सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व पल्लवी पटेल (सोर्स- सोशल मीडिया)
लखनऊ : लोकसभा चुनाव 2024 का रिजल्ट आए हुए 6 दिन बीत चुके हैं। नरेन्द्र मोदी 3.0 सरकार का शपथ ग्रहण भी हो चुका है। लेकिन चुनावी नतीजों का विश्लेषण अब भी जारी है। एक ताजा विश्लेषण में उत्तर प्रदेश से जो कुछ निकलकर सामने आया है उससे पल्लवी पटेल को अपने फैसले पर अफसोस भी हो रहा होगा!
लोकसभा चुनाव 2024 अगर उत्तर प्रदेश को केन्द्र में रखकर नतीजों पर नज़र दौड़ाएं तो यहां बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी को इन चुनावों में अप्रत्याशित तौर पर फायदा हुआ है। नतीजों में सपा न केवल यूपी की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई बल्कि देश में भी उसने तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने का ख़िताब हासिल किया है। यह सब देखने के बाद अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल को अपने फैसले पर अफसोस ज़रूर हो रहा होगा।
2024 लोकसभा चुनाव में पल्लवी पटेल ने एआएमआईएम और स्वामी प्रसाद मौर्य की प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के साथ मिलकर पीडीएम बनाया। पल्लवी ने पार्टी की तरफ से एक दर्जन के आस-पास सीटों पर उम्मीदवार भी उतारे। प्रदेश के सियासी गलियारों में शोर मचा कि पल्लवी पटेल सपा को तगड़ा नुकसान पहुंचाने वाली हैं। लेकिन जब चुनाव के नतीजे आए तो ये शोर सन्नाटे में बदल गया। क्योंकि 11 उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।
जिन सीटों पर अपना दल कमेरावादी के प्रत्याशियों के जमानत जब्त हुई उनमें सीतापुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, झांसी, बांदा, इलाहाबाद, वाराणसी के साथ साथ कौशांबी, फूलपुर और मिर्जापुर भी शामिल हैं। ये वही तीन सीटें हैं जिसको लेकर पल्लवी पटेल की सपा से बात नहीं बनी थी और उन्होंने चुनाव के ठीक पहले ख़ुद को विपक्षी गठबंधन से अलग कर लिया था। इन सभी 11 सीटों पर अपना दल (क) के उम्मीदवार 8 हज़ार वोट भी नहीं हासिल कर सके हैं।
आपको बता दें कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पल्लवी पटेल नें यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू सीट से हराकर सनसनी मचा दी थी। हालांकि तब पल्लवी पटेल सपा के साथ गठबंधन में थी और सपा के सिंबल पर ही चुनाव लड़ा था। ऐसे में चर्चा है कि पल्लवी एक बार फिर से पुराने ढर्रे पर लौट सकती हैं।