

Highlights
अखिलेश पर हमलावर हुए ओपी राजभर
बोले सपा सरकार में हुआ लैपटॉप घोटाला
ओपी ने किया सपा में फुट का दावा कहा सपा के दो और विधायक भाजपा से होंगे शामिल
OP Rajbhar Claims A Split In SP: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इसी बीच योगी सरकार के मंत्री सपा पर तंज कसते नजर आए हैं। ओम प्रकाश राजभर अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। कभी सपा तो कभी कांग्रेस पर हमला करते रहते हैं। हाल ही में सपा के तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए है।
इसी बीच योगी सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने कहा है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक होगा सपा में भगदड़ मच जाएगी। सपा के नेता पार्टी छोड़कर इधर-उधर भगते नजर आएंगे। उन्होंने आगे कहा अंबेडकर नगर के भी सपा के दो विधायक भाजपा में शामिल होने के लिए परेशान हैं। अखिलेश को लेकर कहा कि अखिलेश की स्थिति और बदत्तर होने वाली है। 2017 के चुनाव से ज्यादा बुरा हाल 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
ओपी राजभर अखिलेश यादव पर हमलावर नजर आते रहते हैं। साल 2022 यूपी विधानसभा का चुनाव सपा और राजभर की पार्टी सुभासपा गठबंधन में साथ चुनाव लड़ी थी। मतभेद होने के बाद ओपी सपा से अलग होकर भाजपा का दामन थाम लिए थे। अपने पार्टी के विधायकों को लेकर ओपी राजभर सपा पर हमलावर नजर आते रहते हैं और सुभासपा के विधायकों को सपा के विधायक ठहराते रहते हैं।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायकों ने 14 अक्टूबर 2026 को अमेठी के गौरीगंज में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
राकेश प्रताप सिंह–गौरीगंज विधानसभा सीट (अमेठी) से विधायक
अभय सिंह–गोसाईगंज विधानसभा सीट (अयोध्या) से विधायक
विनोद चतुर्वेदी–कालपी विधानसभा सीट (जालौन) से विधायक
इन तीनों विधायकों ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी, जिसके बाद जून 2025 में इन्हें समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
शामिल होने का अवसर अमेठी के गौरीगंज में आयोजित सदस्यता ग्रहण समारोह में उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में इन्हें पार्टी में शामिल किया गया।
यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि अखिलेश यादव की सरकार के दौरान हुए लैपटॉप घोटाले के बारे में पूरा राज्य जानता है। उन्होंने आगे कहा मौजूदा सरकार के दौर में अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया है। जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव है। यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और समान प्रतिनिधित्व के प्रति समाजवादी पार्टी के विरोध को दर्शाता है। राजनीतिक सत्ता तो विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धिमत्ता नहीं।