नोएडा में चीनी नागरिक का बड़ा कारनामा, बिना वीजा के चला रहा था करोड़ों का हवाला कारोबार, STF ने दबोचा

Hawala Racket In Greater Noida; ग्रेटर नोएडा में STF ने 6 साल से अवैध रूप से रह रहे चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया। आरोपी फर्जी कंपनियों और हवाला के जरिए चीन में करोड़ों रुपये का काला धन भेज रहा था।
greater noida chinese national arrested illegal stay hawala racket stf
सांकेतिक फोटो (सोर्स-AI)
Published on: 
Updated on: 

Chinese Citizen Money Laundering Greater Noida: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र की नींद उड़ा दी है। नोएडा STF ने एक ऐसे चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 6 साल से बिना वैध वीजा के भारत में न केवल रह रहा था, बल्कि यहीं से करोड़ों रुपये का काला कारोबार भी चला रहा था। पकड़े गए आरोपी की पहचान लियाओ लान्गहुई के रूप में हुई है, जो सेक्टर-93 स्थित पॉश सोसाइटी 'पूर्वांचल सिल्वर सिटी' में अपना डेरा जमाए बैठा था,।

फर्जी कंपनियों का जाल और करोड़ों की हेरफेर

एसटीएफ की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लियाओ लान्गहुई कोई साधारण घुसपैठिया नहीं था, बल्कि वह एक बड़े आर्थिक साम्राज्य का संचालन कर रहा था। उसने कई फर्जी (सेल) कंपनियां बना रखी थीं। इन कंपनियों के जरिए वह चीन से कच्चा माल आयात करता था और कागजों में उसकी कीमतों में भारी हेरफेर करता था। दिल्ली के करोलबाग और नेहरू प्लेस जैसे बड़े बाजारों में वह 'अंडर इनवॉयसिंग' (वास्तविक कीमत से कम दिखाना) के जरिए माल बेचता था। इस अवैध प्रक्रिया से जो करोड़ों रुपये बचते थे, उन्हें हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के रास्ते वापस चीन भेज दिया जाता था।

6 साल से सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में झोंक रहा था धूल

हैरानी की बात यह है कि आरोपी लियाओ वर्ष 2018 में भारत आया था। उसका वीजा 2020 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद वह अगले 4 साल तक अवैध रूप से यहीं जमा रहा। इस दौरान न तो खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक लगी और न ही स्थानीय पुलिस को। एसटीएफ ने बुधवार रात को छापेमारी कर लियाओ के साथ उसके दो भारतीय सहयोगियों, गाजियाबाद निवासी संजीव कुमार और औरैया के कौशलेंद्र को भी दबोच लिया है।

खुफिया तंत्र की बड़ी लापरवाही

इस मामले ने विदेशी नागरिकों की निगरानी के लिए बनाए गए सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के मुताबिक, हर विदेशी नागरिक की जानकारी ऑनलाइन सी-फॉर्म पोर्टल पर दर्ज होनी चाहिए और सुरक्षा एजेंसियों को हर महीने इसकी क्रॉस-चेकिंग करनी अनिवार्य है। केंद्रीय गृह मंत्रालय भी जिला स्तर पर विदेशी नागरिकों की डिटेल भेजता है, लेकिन इस मामले में खुफिया एजेंसियों ने केवल 'खानापूरी' की,।

इतना ही नहीं, मकान मालिक ने भी मोटे किराए के लालच में आकर चीनी नागरिक का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया था,। यह लापरवाही तब और गंभीर हो जाती है जब पता चलता है कि पिछले दो वर्षों में नोएडा और आसपास के इलाकों से 6 से अधिक ऐसे विदेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं जो अवैध रूप से रह रहे थे।

STF खंगाल रही है वित्तीय रिकॉर्ड

STF के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र के अनुसार, अभी यह पता लगाना बाकी है कि इस पूरे सिंडिकेट ने कुल कितने करोड़ रुपये की हेरफेर की है। फिलहाल मामले की बारीकी से जांच जारी है और गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इस खुलासे के बाद अब उन मकान मालिकों और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है जिन्होंने विदेशी नागरिकों के सत्यापन में लापरवाही बरती है।

यह घटना एक बड़ा सबक है कि कैसे शहर के बीचों-बीच बैठकर विदेशी नागरिक भारत की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहे हैं और हमारा सुरक्षा तंत्र पूरी तरह बेखबर रहता है।