60 साल बाद खुला बड़ा राज! भारत में वोटर बनकर जी रहा था मलेशियाई नागरिक; आजमगढ़ पुलिस ने किया गिरफ्तार

Azamgarh News: आजमगढ़ में फर्जी दस्तावेजों से मलेशिया की नागरिकता लेने वाला आरोपी गिरफ्तार हुआ है। यह आरोपी भारत में अवैध वोटर बनकर सरकारी योजनाओं का फायदा उठा रहा था।
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आजमगढ़ पुलिस (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Azamgarh Fake Citizenship Case: आजमगढ़ पुलिस ने एक बड़े फरजीवाड़े का खुलासा किया है। निजामाबाद थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जिसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए मलेशिया की नागरिकता हासिल कर ली थी। आरोपी ने अपनी पहचान और पिता का नाम बदलकर विदेश की नागरिकता ली लेकिन भारत में रहकर अवैध तरीके से वोटर बन गया और सरकारी योजनाओं का फायदा उठाता रहा।

एसपी विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सुराई गांव का रहने वाला मोहम्मद कुद्दूस उर्फ कुद्दूस ने धोखाधड़ी से अपना नाम बदलकर मोहम्मद कुद्दूस बिन रज्जाग शाह कर लिया था। वह 1962 में मलेशिया चला गया था और वहां की नागरिकता लेने के बाद भी भारत में सक्रिय बना रहा।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

आरोपी कितना शातिर है इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसने साल 2016 में मलेशिया की नागरिकता प्राप्त कर वहां का पासपोर्ट बनवा लिया था। साथ ही जांच में सामने आया कि उसने चालाकी से प्रवासी भारतीय कार्ड यानी ओआईसी भी हासिल कर लिया। इस कार्ड को हासिल करने के बाद उसे भारत में आने-जाने की परमिशन मिल गई। ओसीआई कार्ड धारक होने के बावजूद उसने सुराई की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा लिया था, जो गैरकानूनी है यानी वह एक भारतीय नागरिक का मुखौटा पहनकर विभिन्न सरकारी लाभ और सुविधाओं को अवैध रूप से प्राप्त कर रहा था।

प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान भी आरोपी ने अपनी असली जानकारी छिपाई और मतदाता बनने के लिए फॉर्म भरकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की। मामला सामने आने के बाद निजामाबाद थाने में उसके खिलाफ जालसाजी समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने उसे सबूत पेश करने के लिए थाने बुलाया लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद आरोप सही पाए जाने पर पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया।

फर्जी दस्तावेजों पर कड़ी कार्रवाई शुरू

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में किन स्थानीय कर्मचारियों या बिचौलियों ने उसकी मदद की थी। कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए ओसीआई कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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