ट्रेन की चपेट में आने से मां-बेटे की मौत, बहराइच का है यह मामला
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में ट्रेन के चपेट में आने से मां-बेटे की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक बच्चा अपनी मां से हाथ छुड़ाकर रेलवे लाइन की तरफ भागा। बच्चे को बचाने के लिए मां भी पीछे-पीछे दौड़ी तभी ट्रेन आ गई।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
प्रतीकात्मक फोटो- ट्रेन
बहराइच : बहराइच जिले में बहराइच-गोंडा रेल प्रखंड पर ट्रेन की चपेट में आने से मां-बेटे की मौत हो गई। पुलिस क्षेत्राधिकारी पहुप सिंह ने 1 जून दिन रविवार को बताया कि शनिवार शाम रोशनी गुप्ता (25) अपने बेटे दिव्यांश (4) के साथ बाजार गई थी। लौटते वक्त वह बहराइच-गोंडा रेल प्रखंड के रेलवे पिलर संख्या 59/21 के निकट रेलवे लाइन पार करने के लिए खड़ी थी।
पुलिस क्षेत्राधिकारी पहुप सिंह ने बताया कि इसी बीच, बहराइच से गोंडा की ओर जा रही डेमो ट्रेन को देखकर बच्चा अपनी मां से हाथ छुड़ाकर रेलवे लाइन की तरफ भागा। बच्चे को बचाने के लिए उसकी मां भी पीछे-पीछे दौड़ी तभी ट्रेन आ गई। उसकी चपेट में आने से दोनों की मौत हो गई।
रेलवे पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव
पहुप सिंह ने आगे बताया कि राजकीय रेलवे पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस संबंध में बख्शीपुरा निवासी समाजसेवी अरूण कुमार मिश्र ने बताया कि रेलवे लाइन के उस पार मोहल्लों व बस्तियों में पांच हजार से अधिक बने पक्के मकानों में करीब 30-35 हजार लोग रहते हैं।
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समाजसेवी अरूण कुमार मिश्र ने क्या कहा?
समाजसेवी अरूण कुमार मिश्र ने बताया कि लोगों के आने-जाने के लिए कोई अंडर पास नहीं है, वहीं ओवर ब्रिज के निर्माण के नाम पर तीन साल पहले रेलवे क्रासिंग को बंद कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि एक और रास्ता है जिसपर दो फुट जलभराव के कारण लोगों को बस्ती में जाने के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है इसलिए लोग जान जोखिम में डाल कर पटरी पार करते हैं।
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समाजसेवी अरूण कुमार मिश्र ने बताया कि इस संबंध में सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों व एमएलसी के पत्रों सहित अनेक प्रतिवेदन रेल मंत्री व रेलवे के अधिकारियों को दिए जा चुके हैं मगर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
(-एजेंसी इनपुट के साथ।)
