

Mathura-Vrindavan Parikrama Route: विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी वृंदावन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक और यातायात व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार और एकादशी के अवसर पर वृंदावन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और वृंदावन की परिक्रमा के लिए सुबह से ही मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। इसके बावजूद परिक्रमा मार्ग पर ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली और बाहरी नंबरों के वाहन फर्राटा भरते नजर आए।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार, वृंदावन कोतवाली क्षेत्र में बांके बिहारी मंदिर मार्ग और परिक्रमा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे हैरानी की बात यह रही कि रविवार और एकादशी जैसे भीड़भाड़ वाले दिन ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली बांके बिहारी मंदिर मार्ग तक कैसे पहुंच गई। भारी वाहन के मार्ग पर आने से श्रद्धालुओं को किनारे होकर निकलना पड़ा।
परिक्रमा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही कोई पहली घटना नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी वृंदावन के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वाहन दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की जान तक जा चुकी है। हादसों के बाद यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं और कुछ समय के लिए व्यवस्थाएं सख्त दिखाई देती हैं, लेकिन बाद में स्थिति फिर पुराने ढर्रे पर लौटने का आरोप स्थानीय लोग लगाते हैं।
श्रद्धालुओं का सवाल है कि आखिर हादसों के बावजूद प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं बना पा रही है। क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, परिक्रमा मार्ग पर दिल्ली और हरियाणा नंबर के कुछ वाहन भी तेज गति से गुजरते दिखाई दिए। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच वाहनों की रफ्तार को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। कई परिक्रमार्थी अचानक सामने आए वाहनों से बचते नजर आए और कुछ लोग बाल-बाल बच गए।
वृंदावन में परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि परिक्रमा मार्ग मूल रूप से पैदल चलने वाले भक्तों के लिए सुरक्षित होना चाहिए। ऐसे में भारी वाहनों और तेज रफ्तार कारों की मौजूदगी किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि एकादशी, रविवार, पूर्णिमा और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान परिक्रमा मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। इसके साथ ही मार्ग के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर लगाकर बाहरी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और ट्रैफिक पुलिस की प्रभावी तैनाती की मांग की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रविवार और एकादशी जैसे महत्वपूर्ण दिन जब प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, तब ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली और तेज रफ्तार बाहरी वाहन परिक्रमा मार्ग तक कैसे पहुंच गए।
घटना सामने आने के बाद देखना होगा कि उच्चाधिकारी मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार लोगों और वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में परिक्रमा मार्ग को भारी और तेज रफ्तार वाहनों से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस क्या ठोस कदम उठाती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि प्रभावी और स्थायी यातायात व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।