

Vrindavan Sawan Jhula Festival: सावन मास शुरू होते ही ठाकुर बांके बिहारी की नगरी वृंदावन भक्ति, प्रेम और हरियाली के रंग में रंग उठी है। झूलन उत्सव को लेकर मंदिरों से लेकर बाजारों तक विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। भगवान श्रीराधा-कृष्ण को झूला झुलाने की प्राचीन धार्मिक परंपरा के कारण सावन का यह पर्व ब्रज की आध्यात्मिक संस्कृति में विशेष महत्व रखता है।
वृंदावन के बाजार इन दिनों रंग-बिरंगे झूलों से सज गए हैं। चंदन, शीशम और आम की लकड़ी से तैयार पारंपरिक झूलों के साथ आधुनिक डिजाइन वाले झूले भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। कहीं नक्काशीदार झूले हैं तो कहीं फूलों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित झूले, जिन पर श्रद्धालु अपने आराध्य राधा-कृष्ण को विराजमान कर झुलाने के लिए खरीदारी कर रहे हैं। आधुनिक दौर में इलेक्ट्रॉनिक और विशेष तकनीक से संचालित झूलों की भी मांग देखने को मिल रही है।
सावन में हरियाली तीज का विशेष महत्व होने के कारण भगवान के श्रृंगार में भी हरे रंग की प्रधानता रहती है। हरे वस्त्र, मुकुट, पोशाक, आभूषण, फूलों की मालाएं और अन्य श्रृंगार सामग्री से बाजार सजे हुए हैं। श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में ठाकुरजी का सावन स्वरूप सजाने के लिए इन वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं।
देश-विदेश से वृंदावन पहुंचने वाले श्रद्धालु इस झूलन उत्सव को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और ब्रज की भक्ति परंपरा से जुड़ने का अवसर मानते हैं। सावन की रिमझिम फुहारों, हरियाली और झूलों के बीच गूंजते राधे-राधे के जयकारे वृंदावन के वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना रहे हैं।
ब्रज की मान्यता है कि सावन में राधारानी और श्यामसुंदर को झूला झुलाने से भक्त के मन में प्रेम, आनंद और भक्ति का संचार होता है। यही कारण है कि झूलन उत्सव के साथ पूरा वृंदावन इन दिनों भक्ति और उत्सव के अद्भुत रंग में डूबा नजर आ रहा है।