

Mathura Sugar Mill Protest: शुगर मिल को चालू कराने की मांग को लेकर अनशन कर रहे समाजसेवी दीपक शर्मा को कथित तौर पर जबरन हटाए जाने का मामला सामने आया है। दीपक शर्मा ने छाता पुलिस और तहसील प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अनशन समाप्त कराने के दौरान उनके साथ कथित रूप से ज्यादती और मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद कुछ निजी लोगों ने भी उनके साथ मारपीट की।
अनशन समाप्त कराने के लिए पुलिस ने जबरन हटाया
दीपक शर्मा का कहना है कि वह क्षेत्र की शुगर मिल को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर अनशन कर रहे थे। उनका उद्देश्य किसानों और क्षेत्र के लोगों से जुड़े इस मुद्दे को प्रशासन के सामने उठाना था। आरोप है कि अनशन समाप्त कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके साथ सख्ती की और उन्हें जबरन वहां से हटाया गया।
समाजसेवी ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान उनके साथ अभद्रता की गई और कथित रूप से उन्हें टॉयलेट तक पिलाया गया। उन्होंने पुलिस और निजी लोगों पर जबरदस्त मारपीट करने का आरोप भी लगाया है। दीपक शर्मा के अनुसार, उन्हें एंबुलेंस में ले जाते समय भी कथित तौर पर मारपीट की गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उन्होंने पुलिस और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
दीपक शर्मा का यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ी की चाबी और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। उनका कहना है कि अनशन को समाप्त कराने के लिए जिस तरह की कार्रवाई की गई, वह सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से कहीं अधिक सख्त थी।
घटना के बाद दीपक शर्मा को जिला अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा उन्हें 10 से 12 इंजेक्शन लगाए गए। हालांकि, अस्पताल में उनके उपचार और इंजेक्शन लगाए जाने के संबंध में विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने आना अभी बाकी है। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।
समाजसेवी ने इस पूरे मामले को लेकर देहात पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस का रवैया लगातार बेलगाम होता जा रहा है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों के साथ भी सख्ती की जा रही है।
वहीं, इस मामले में पुलिस और तहसील प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दीपक शर्मा को अनशन स्थल से किन परिस्थितियों में हटाया गया और कार्रवाई के दौरान वास्तव में क्या हुआ। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
शुगर मिल को चालू कराने की मांग से जुड़े इस विवाद के बाद अब सवाल यह है कि प्रशासन अनशनकारी के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।