

Hema Malini Fake Letterhead Case: मथुरा सांसद हेमा मालिनी के नाम और पत्र का कथित रूप से दुरुपयोग कर पूर्व सांसद राजेश कुमार दिवाकर के लिए आवास आवंटित कराने का प्रयास किए जाने के मामले में थाना सदर बाजार पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में सांसद हेमा मालिनी के प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 18 अगस्त 2026 को थाना सदर बाजार में FIR संख्या 0255 दर्ज की है।
शिकायत के अनुसार सांसद कार्यालय को एक व्यक्ति के माध्यम से कथित तौर पर जानकारी मिली कि अशोक गुप्ता नामक व्यक्ति ने सांसद हेमा मालिनी के लेटरहेड का इस्तेमाल करते हुए पूर्व सांसद राजेश कुमार दिवाकर के लिए आवास आवंटित किए जाने का अनुरोध किया। आरोप है कि इस संबंध में तैयार किए गए पत्र पर सांसद हेमा मालिनी के हस्ताक्षर नहीं थे और न ही सांसद की ओर से ऐसा कोई पत्र किसी व्यक्ति को जारी किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सांसद के नाम और लेटरहेड का इस्तेमाल कर तैयार किए गए कथित पत्र के माध्यम से संबंधित विभाग से आवास आवंटन कराने का प्रयास किया गया। मामला सामने आने के बाद सांसद कार्यालय की ओर से पुलिस से इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व सांसद राजेश कुमार दिवाकर इस पूरे प्रकरण से व्यक्तिगत रूप से परिचित नहीं हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को कथित जालसाजी और आपराधिक धोखाधड़ी का मामला बताते हुए पुलिस से जांच की मांग की थी।
मथुरा पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज तैयार करने अथवा उसके इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े आरोपों की जांच की जाती है।
FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने में जुट गई है। जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि सांसद हेमा मालिनी के लेटरहेड का कथित रूप से इस्तेमाल किसने किया, संबंधित पत्र किसने तैयार किया, उसमें सांसद के नाम और पद का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया और कथित आवास आवंटन के प्रयास में कौन-कौन लोग शामिल थे।
इसके अलावा पुलिस कथित पत्र की प्रमाणिकता, उसके तैयार होने के तरीके और संबंधित विभाग तक उसके पहुंचने की प्रक्रिया की भी जांच कर सकती है। दस्तावेज किस माध्यम से भेजा गया और उसके आधार पर आवास आवंटन की प्रक्रिया में कोई कदम उठाया गया या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा।
मामले में FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अभी तक पुलिस जांच पूरी नहीं हुई है और FIR में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब इस मामले में पुलिस जांच के परिणाम और कथित फर्जी पत्र तैयार करने तथा उसका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान पर सभी की नजरें टिकी हैं।