मथुरा विवाद में नया मोड़; फलाहारी महाराज ने ईदगाह कमेटी को लिखा पत्र, 20 एकड़ जमीन देने के लिए की पेशकश

Mathura Mosque Dispute: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष की ओर से फलाहारी महाराज ने ईदगाह कमेटी को पत्र लिखकर मेवात में 20 एकड़ जमीन देने, मस्जिद निर्माण का खर्च उठाने की पेशकश की है
Mathura Mosque Dispute: Falahari Maharaj Offers 20 Acres of Land in Mewat for Settlement
फलाहारी महाराज (सोर्स- फोटो नवभारत)
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Mathura Krishna Janmabhoomi Shahi Eidgah: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हिंदू पक्ष की ओर से समझौते को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने आया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर से जुड़े मुकदमे में वादी दिनेश फलाहारी महाराज ने ईदगाह कमेटी को पत्र लिखकर कहा है कि यदि मुस्लिम पक्ष न्यायालय के बाहर आपसी सहमति से विवाद का समाधान चाहता है तो हिंदू पक्ष बातचीत के लिए तैयार है।

उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि मस्जिद निर्माण के लिए मेवात में 20 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के साथ निर्माण में होने वाला खर्च भी हिंदू पक्ष उठाने को तैयार है।

आपसी सहमति तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण में हो समाधान

फलाहारी महाराज का कहना है कि मथुरा प्रेम और भाईचारे की नगरी है और विवाद का समाधान आपसी सहमति तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेवात क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की बड़ी आबादी है, जबकि ब्रजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की बड़ी संख्या है। ऐसे में दोनों पक्ष अपनी-अपनी धार्मिक आस्थाओं के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से पूजा-अर्चना और नमाज कर सकें, यही उनकी मंशा है।

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लोक अदालत में गायब रहा मुस्लिम पक्ष

यह बयान ऐसे समय आया है जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद से संबंधित दो दर्जन से अधिक मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन बताए जा रहे हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान प्रकरण से जुड़ी पत्रावली को सुलह-समझौते के प्रयास के लिए स्थानीय स्थायी लोक अदालत भेजे जाने की बात कही गई है। हिंदू पक्ष की ओर से लोक अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई गई, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से उपस्थिति नहीं होने पर हिंदू पक्ष में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई है।

बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालकर बने सामाजिक सौहार्द

फलाहारी महाराज ने अपने पत्र और बयान में कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान चाहता है तो हिंदू पक्ष को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मध्यस्थता की प्रक्रिया में शामिल करने का प्रस्ताव रखा जाता है, तब भी उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। उनका कहना है कि बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालकर मथुरा में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है।

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भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि में शांति, प्रेम तथा भाईचारा बना रहना चाहिए

वहीं, इसी विवाद को लेकर चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सदानंद जी महाराज की ओर से 6 दिसंबर को कारसेवा से संबंधित बयान सामने आने के बाद भी माहौल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हिंदू पक्ष के कुछ लोगों की ओर से इसे धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद के समाधान की दिशा में कदम बताया जा रहा है, जबकि ऐसे बयानों से कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ सकती है।

फलाहारी महाराज ने कहा कि हिंदू पक्ष चाहता है कि दोनों समुदाय बड़े दिल का परिचय दें और आपसी बातचीत से विवाद का समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है और यहां शांति, प्रेम तथा भाईचारा बना रहना चाहिए।

मुस्लिम पक्ष से शांतिपूर्ण समाधान के लिए की अपील

उन्होंने मुस्लिम पक्ष से अपील करते हुए कहा कि यदि आपसी सहमति से समाधान की संभावना बनती है तो दोनों पक्षों को आगे आकर बातचीत करनी चाहिए। उनका दावा है कि इससे लंबे समय से चले आ रहे विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सकता है और मथुरा में सामाजिक सौहार्द की स्थिति और मजबूत होगी।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर मुस्लिम पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।

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