

Mathura Kanwar Yatra: “भोलेनाथ मेरी पुकार सुन लेना... फिर से स्कूल जाना है।” सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में मथुरा के चार बच्चों की यह भावुक पुकार सामने आने के बाद प्रशासन ने उनकी मदद के लिए कदम बढ़ाया है।
दिव्यांग माता-पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और स्कूल फीस जमा न कर पाने के कारण पढ़ाई प्रभावित होने का दावा करते हुए चारों भाई-बहन हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले थे। बच्चों की मनौती थी कि भोलेनाथ उनकी फरियाद सुनेंगे और उनकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो जाएगी।
बच्चों की यह कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। वीडियो में बच्चे कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते नजर आए और पढ़ाई दोबारा शुरू कराने की इच्छा जताते दिखाई दिए।
बच्चों के अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह स्कूल की फीस और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्च आसानी से उठा सके। इसी परेशानी के बीच बच्चों ने भगवान शिव से अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कराने की मनौती मांगी।
वीडियो वायरल होने के बाद मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने चारों बच्चों और उनके दिव्यांग माता-पिता को कार्यालय बुलाकर परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चों की पढ़ाई के संबंध में जानकारी ली। प्रशासन की ओर से बच्चों की शिक्षा को लेकर तत्काल मदद की व्यवस्था की गई।
जानकारी के अनुसार, दो बच्चों की फीस माफ करा दी गई है, जबकि तीसरे बच्चे की फीस पहले से ही माफ है। चौथे बच्चे पर स्कूल फीस लागू नहीं होती। इसके अलावा प्रशासन की ओर से चारों बच्चों को स्कूल बैग, किताबें और ड्रेस भी उपलब्ध कराई गईं। इससे बच्चों के सामने पढ़ाई जारी रखने के लिए जरूरी संसाधनों की समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।
परिवार के अनुसार, बच्चों के माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं और उनकी आमदनी सीमित है। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई। चारों बच्चे पढ़-लिखकर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं। इसी उम्मीद में उन्होंने भगवान शिव का सहारा लेते हुए कांवड़ यात्रा शुरू की।
हालांकि, विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों को केवल फीस जमा न करने के कारण स्कूल से निकाले जाने के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। विद्यालय प्रबंधक तरुण गुप्ता के अनुसार, चार में से तीन बच्चे उनके विद्यालय में पढ़ते हैं।
तीनों बच्चे 24 जुलाई से स्कूल नहीं आ रहे थे। उनका कहना है कि फीस जमा न होने के बावजूद बच्चों को परीक्षा में बैठने का अवसर दिया गया था। लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ निष्कासन की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
अब प्रशासन की पहल के बाद बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने की दिशा में रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। बताया गया है कि एसडीएम ने चारों बच्चों को गोद लेने की बात कही है। साथ ही उनके दिव्यांग माता-पिता को दिव्यांग पेंशन का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
कांवड़ लेकर निकले इन बच्चों की कहानी ने एक ओर उनकी भोलेनाथ के प्रति आस्था और पढ़ाई के प्रति लगन को सामने रखा, वहीं दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों को भी उजागर किया। बच्चों की मासूम पुकार सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन तक पहुंची और अब उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए मदद का भरोसा मिला है। चारों बच्चों के लिए यह पहल उनकी कांवड़ यात्रा से जुड़ी उस मनौती के पूरा होने की उम्मीद लेकर आई है, जिसमें उन्होंने भोलेनाथ से सिर्फ एक ही प्रार्थना की थी—“फिर से स्कूल जाना है।”