

Krishna Janmabhoomi Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान करने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव को शास्त्रीय मर्यादाओं, धार्मिक परंपराओं और प्राचीन विधि-विधान के अनुरूप मनाया जाएगा। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन होगा।
जन्मोत्सव को लेकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में मंदिर की साज-सज्जा से लेकर ठाकुरजी के श्रृंगार, विशेष पोशाक, अभिषेक, दर्शन और श्रद्धालुओं की सुविधा तक व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपीश्वरनाथ चतुर्वेदी के अनुसार इस बार जन्मोत्सव को और अधिक आकर्षक, दिव्य एवं यादगार बनाने के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकेशवदेव जी को विशेष रूप से तैयार किए जा रहे ‘कलहंस’ पुष्प बंगले में विराजमान कराया जाएगा। पुष्प बंगले को आकर्षक फूलों और विभिन्न प्राकृतिक सजावटी तत्वों से सजाया जा रहा है। मंदिर परिसर में विशेष लाइटिंग और प्रकाश व्यवस्था भी की जा रही है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि का विशाल मंदिर परिसर जन्माष्टमी के अवसर पर रात में रोशनी से जगमगाता नजर आएगा। मंदिर के शिखर और परिसर की सजावट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि दूर से ही श्रद्धालुओं को जन्मभूमि की भव्यता और दिव्यता का अनुभव हो सके।
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण विशेष ‘पंचरत्नी’ पोशाक धारण करेंगे। इस पोशाक को विशेष धार्मिक भाव और कलात्मकता के साथ तैयार कराया गया है। पोशाक में समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों की कल्पना को आधार बनाते हुए शेषनाग, अमृत कलश, ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष सहित विभिन्न धार्मिक प्रतीकों को उकेरा गया है।
जरी, रेशम और रत्नों की प्रतिकृतियों के प्रयोग से तैयार की गई यह पोशाक ठाकुरजी के श्रृंगार का विशेष आकर्षण होगी। भगवान के श्रृंगार में रत्नजड़ित मुकुट, बांसुरी, नवरत्न जड़ित कंठा सहित अनेक आभूषण शामिल किए जाएंगे। वहीं भगवती योगमाया जी को विशेष दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण कराया जाएगा।
जन्माष्टमी से एक दिन पूर्व 3 सितंबर की शाम 5:30 बजे विशेष पोशाक अर्पण एवं दर्शन कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके लिए भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। भगवान केशवदेव जी, भगवती योगमाया जी, श्रीगर्भगृह जी और राधाकृष्ण युगल सरकार के लिए तैयार विशेष वस्त्र, आभूषण एवं श्रृंगार सामग्री शोभायात्रा के माध्यम से जन्मस्थान परिसर में लाई जाएगी।
काशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त ठाकुरजी के प्रसाद, सुगंधित द्रव्य तथा अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से आए उपहार एवं अभिषेक सामग्री को भी इस विशेष आयोजन में शामिल किया जाएगा।
शोभायात्रा श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के समीप रेलवे क्रॉसिंग वाले मुख्य मार्ग से होते हुए जन्मस्थान परिसर में प्रवेश करेगी। घंटा-घड़ियाल, झांझ-मंजीरे, मृदंग और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच निकलने वाली शोभायात्रा भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
इस वर्ष जन्मोत्सव के दौरान ‘गौरक्षा-राष्ट्ररक्षा’ का संकल्प भी कराया जाएगा। आयोजकों के अनुसार गौमाता की रक्षा, सम्मान, संवर्धन और संरक्षण के भाव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जन्मभूमि आने वाले श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया जाएगा।
सजीव प्रसारण के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में जन्मोत्सव से जुड़े कृष्णभक्तों को भी इस संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से गौसेवा और गौसंरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचना चाहिए।
4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन प्रातः 5:30 बजे से रात्रि 1:30 बजे तक जन्मस्थान परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। सुबह शहनाई और नगाड़ों की मधुर एवं मंगल ध्वनि के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन होंगे।
इसके बाद सुबह करीब 8 बजे पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। भगवान का कमल-पुष्प और तुलसीदल से पुष्पार्चन होगा। मंगलाचरण और वेद मंत्रों का सस्वर उच्चारण वातावरण को आध्यात्मिकता से भर देगा। ब्रज के प्रसिद्ध कलाकार ठाकुरजी के सम्मुख भजन-गायन प्रस्तुत करेंगे।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का मुख्य आकर्षण मध्यरात्रि का जन्म महाभिषेक होगा। रात्रि में गणेश एवं नवग्रह पूजन आदि से कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद भगवान का सहस्रार्चन किया जाएगा।
मध्यरात्रि से ठीक पहले प्राकट्य दर्शन की तैयारी के लिए पट बंद होंगे। जैसे ही घड़ी की सुइयां रात 12 बजे का संकेत देंगी, भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज सुनाई देगी। इसके साथ ही भगवान के प्राकट्य दर्शन और आरती होगी।
प्राकट्य के बाद कामधेनु स्वरूपा रजत गाय द्वारा भगवान के विग्रह का पयोधर महाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद रजत कमल पुष्प में विराजमान ठाकुरजी का जन्म-महाभिषेक होगा।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म महाभिषेक में दूध, दही, घी, शर्करा और शहद के साथ विभिन्न औषधियों, वनस्पतियों एवं सुगंधित द्रव्यों का मिश्रण प्रयोग किया जाएगा।
कामधेनु स्वरूपा रजत गाय द्वारा होने वाला अभिषेक विशेष आकर्षण रहेगा। इसके बाद ठाकुरजी रजत कमल पुष्प में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। जन्म महाभिषेक के पश्चात श्रृंगार आरती होगी और निर्धारित समय पर शयन आरती भी आयोजित की जाएगी।
इस बार श्रीगर्भगृह को विशेष स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। गर्भगृह के चबूतरे और दीवारों की सजावट में करीब 200 किलोग्राम चांदी का प्रयोग किया गया है। पुष्प, पत्तियों और विभिन्न कलात्मक सजावटी वस्तुओं के संयोजन से गर्भगृह की सजावट की जा रही है।
नवनिर्मित रजत कमल में विराजमान श्रीगोपाल जी का जन्माभिषेक श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। भीड़ को नियंत्रित करने और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को गर्भगृह के दिव्य दर्शन कराने के लिए बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दर्शन प्रसारित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
श्रीगर्भगृह के समीप स्थित राज-राजेश्वरी अष्टभुजा मां योगमाया मंदिर को भी जन्मोत्सव के लिए विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिर में सिंहासन, पिछवाई, दिव्य अस्त्र-शस्त्र, सिंह और दिव्य पादुकाएं चांदी से निर्मित कराई गई हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर मां योगमाया का विशेष पूजन एवं अभिषेक किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंग में योगमाया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए जन्माष्टमी आयोजन में योगमाया मंदिर का भी विशेष महत्व है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पवित्र लीलामंच पर 1 से 5 सितंबर तक पांच दिवसीय कृष्ण लीला का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
1 सितंबर को माखन चोरी-गोपल लीला, 2 सितंबर को मीरा बाई चरित्र लीला, 3 सितंबर को श्याम-श्याम मिलन लीला, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्म लीला और 5 सितंबर को श्रीगिरिराज पूजा एवं छप्पन भोग लीला प्रस्तुत की जाएगी।
प्रसिद्ध रासाचार्य स्वामी देवकीनंदन और उनकी रास मंडली द्वारा पारंपरिक कृष्ण लीलाओं की प्रस्तुति की जाएगी। आयोजन में ब्रज की पारंपरिक संस्कृति, भक्ति और लोककलाओं का विशेष समावेश रहेगा।
जन्माष्टमी पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मथुरा पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुविधा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जन्मभूमि के प्रमुख मार्गों पर जूता घर और सामान घर बनाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।
श्रद्धालुओं के सुगम प्रवेश और निकास के लिए बैरिकेडिंग की जा रही है। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश गोविंद द्वार यानी गेट नंबर-3 से होगा, जबकि निकास मुख्य द्वार यानी गेट नंबर-1 से कराया जाएगा।
व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को कम से कम समय में दर्शन उपलब्ध कराना और भीड़ के दबाव को नियंत्रित रखना है।
भीड़ के दौरान बच्चों, बुजुर्गों अथवा अन्य परिजनों के बिछड़ने की स्थिति को देखते हुए गेट नंबर-1 के समीप वाहन पार्किंग परिसर में खोया-पाया केंद्र बनाया जा रहा है। केंद्र के आसपास लाउडस्पीकर की व्यवस्था भी रहेगी, ताकि खोए हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने में सुविधा हो।
प्रत्येक सामान घर और जूता घर के साथ आकस्मिक परिस्थितियों में श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए संबंधित चिकित्सा अधिकारियों के सहयोग से आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर परिसर में दर्शन के लिए आते समय मोबाइल फोन, कैमरा, रिमोट की रेंज, माचिस, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, चाकू, ब्लेड सहित अन्य प्रतिबंधित सामान अपने साथ लेकर न आएं।
श्रद्धालु ऐसे सामान को अपने वाहन अथवा ठहरने के स्थान पर ही छोड़कर आएं। आवश्यकता होने पर निर्धारित सामान घर में सामान जमा कर उसकी रसीद प्राप्त की जा सकती है।
संस्थान की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें, निर्धारित प्रवेश और निकास मार्ग का पालन करें तथा सुरक्षा एवं सुविधा के लिए तैनात कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर होने वाले 5253वें जन्मोत्सव को लेकर तैयारियों का सिलसिला जारी है। भव्य पुष्प बंगले, पंचरत्नी पोशाक, रजत सजावट, विशेष अभिषेक, कृष्ण लीला और आधी रात के प्राकट्य दर्शन के साथ इस बार का जन्मोत्सव श्रद्धा और भव्यता का अनूठा संगम बनने जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपरा का संदेश लेकर लौटेंगे।