

Swami Haridas Jayanti Celebration Vrindavan: धर्म नगरी मथुरा- वृंदावन में को ठाकुर बांके बिहारी महाराज के प्राकट्यकर्ता संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास महाराज का 523वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। आविर्भाव महोत्सव के पावन मौके पर उनकी साधना स्थली श्रीनिधिवनराज मंदिर में प्रातः भोर से ही श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी। जहां, मंदिर के सेवायत गोस्वामियों ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ स्वामी महाराज का विधिविधान से पंचामृत अभिषेक कर पूजन किया। इस दौरान संगीत प्रेमी और श्रद्धालुओं ने भी महाराजश्री के अभिषेक के दर्शन तथा उन्हें जन्मोत्सव की बधाई देकर स्वयं को धन्य किया।
स्वामी हरिदास अपनी सुमधुर संगीत साधना से श्री प्रिय प्रियतमा जू को रिझाते थे। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार जब स्वामी हरिदास के तानपुरे से स्वरलहरियां निकलती थीं तब स्वयं श्री राधा कृष्ण युगल स्वरूप में निधिवनराज में उपस्थित हो जाते थे। स्वामी हरिदास जी की संगीत कला से प्रभावित होकर सम्राट अकबर के नवरत्नों में शुमार तानसेन एवं बेजूबाबरा ने उनसे संगीत की दीक्षा ली थी।
कहा जाता है कि विक्रम संवत 1560 में मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि पर स्वामी जी ने अपनी संगीत साधना से भक्तों की आस्था के केंद्र बिंदु ठाकुर बांकेबिहारी जी को प्रकट किया था।
निधिवनराज मंदिर के सेवायत रोहित कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि राधा अष्टमी वाले दिन ही स्वामी हरिदास जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। आज ठाकुर जी का 523 वां जन्मदिवस है। इस अवसर पर उनका पंचामृत से अभिषेक हुआ है और उसके बाद पूरे दिन यहां पर बधाई गायन होगा। उसके बाद चांदी के रथ में विराजमान होकर बांके बिहारी जी बधाई लेकर आएंगे। उसके बाद उनका भोग लगता है और आरती होती है। श्रद्धालु सुषमा वर्मा ने बताया कि वो लखनऊ से पहली बार स्वामी श्री हरिदास जी का अभिषेक देखने आई हैं। उन्होंने कहा, इस वक्त इतना अच्छा लग रहा है कि मैं अपनी बातों को शब्दों में नहीं बता सकती।