

Jaya Kishori Bhagwat Katha Agra: फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम परिसर रविवार को भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर हो गया। पूज्य जया किशोरी की श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का ऐसा दिव्य आयोजन हुआ कि पूरा पंडाल मानो गोकुलधाम में बदल गया।
"जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया..." और "लोचन अभिरामा, तनु घनश्यामा..." जैसे मंगल गीतों के बीच हजारों श्रद्धालु जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयघोष करते हुए भक्ति में झूम उठे। कथा परिसर को रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था, जबकि भगवान के स्वरूपों की मनमोहक झांकियों और जन्मोत्सव पर श्रद्धालुओं के बीच उपहार वितरण ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।
व्यासपीठ से पूज्य जया किशोरी ने श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्म के साथ भगवान वामन अवतार की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर धर्म की रक्षा की। उन्होंने नारद और युधिष्ठिर संवाद का उल्लेख करते हुए धर्म के पांच प्रमुख लक्षण—सत्य, दया, पवित्रता, संतोष और दान—को जीवन का आधार बताया।
उन्होंने गंगा स्नान के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि गंगा में डुबकी लगाने से जानबूझकर किए गए पाप नहीं धुलते, बल्कि अनजाने में हुई गलतियों का प्रायश्चित तभी संभव है जब व्यक्ति सच्चे मन से पश्चाताप करे। इसलिए यह सोचकर पाप करना कि बाद में गंगा स्नान से सब मिट जाएगा, धर्म की सही भावना नहीं है।
राजा बलि और भगवान वामन की कथा के माध्यम से उन्होंने त्याग और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि त्याग के बिना कभी तृप्ति नहीं मिल सकती। आज मनुष्य मोह, माया और भोग-विलास में इतना उलझ गया है कि अपना काम न बनने पर भगवान तक बदलने लगता है। उन्होंने कहा कि भगवान की बनाई यह सृष्टि युगों से सुचारु रूप से चल रही है, जबकि मनुष्य द्वारा बनाए गए मोबाइल फोन को बार-बार अपडेट करना पड़ता है। इसलिए ईश्वर की व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए।
मोहिनी अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि केवल बाहरी सुंदरता के पीछे भागने वाला व्यक्ति जीवन का अमृत खो देता है। आकर्षण सुंदरता से होता है, लेकिन प्रेम सद्गुणों से जन्म लेता है। वहीं गजेन्द्र मोक्ष की कथा के माध्यम से उन्होंने सांसारिक रिश्तों की वास्तविकता और ईश्वर की शरणागति का महत्व समझाया।
कथा के दौरान "मुझे ऐसी लगन तू लगा दे...", "राधे तेरे चरणों की...", "श्रीराम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में...", "है दुख भंजन मारुति नन्दन..." और "कीजो केसरी लाल..." जैसे भजनों पर पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालु नृत्य करते हुए भगवान के जन्मोत्सव का उत्सव मनाते नजर आए।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन मूल्यों से भर देने वाला अविस्मरणीय आयोजन बताया।