

प्रदर्शनी से ODOP और ODOC उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा
75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की लगीं करीब 125 दुकानें
दिवाली से पहले लखनऊ में सजा यूपी के स्वाद और हुनर का मेला
Lucknow Food Festival: दिवाली से पहले लखनऊ में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों का स्वाद और हुनर एक ही जगह देखने को मिल रहा है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित Taste of Uttar Pradesh 2026 प्रदर्शनी में कहीं आजमगढ़ की मशहूर ब्लैक पॉटरी लोगों को आकर्षित कर रही है तो कहीं अयोध्या का खुरचन पेड़ा और सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल चर्चा में है। 4 और 5 नवंबर को आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की करीब 125 दुकानें लगाई गई हैं। इसके साथ ही ODOP और ODOC के तहत जिलों के खास उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं। लोग यहां खरीदारी के साथ अलग-अलग जिलों के स्वाद का आनंद भी ले रहे हैं।
आजमगढ़ की निजामाबाद ब्लैक पॉटरी प्रदर्शनी में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस शिल्प से पिछले 35 साल से जुड़े सोहित प्रजापति ने बताया कि पहले मिट्टी और पोखरे की कमी के कारण काम करना मुश्किल होता था। हाथ से चाक चलाने में भी काफी समय लगता था।
उन्होंने बताया कि सरकार की मदद से अब मिट्टी और पोखरे की सुविधा मिली है। साथ ही बिजली से चलने वाला चाक भी उपलब्ध कराया गया है। इससे काम पहले के मुकाबले आसान हुआ है। अब दीये और बर्तनों के अलावा पानी की बोतल, भगौना, कड़ाही और कई तरह के नए डिजाइन भी तैयार किए जा रहे हैं।
दिवाली को देखते हुए शंख के आकार वाले दीयों की मांग ज्यादा है। सोहित ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया था, जब मिट्टी की कमी के चलते उन्हें यह काम छोड़कर नौकरी की तरफ जाना पड़ा। हालांकि, सरकारी मदद मिलने के बाद वह दोबारा अपने पुश्तैनी काम से जुड़ सके। निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी को GI टैग भी मिला है और यह आजमगढ़ के ODOP उत्पादों में शामिल है।
प्रदर्शनी में अयोध्या का मशहूर खुरचन पेड़ा भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है। एक जिला एक व्यंजन (ODOC) के तहत मौर्या मिष्ठान भंडार ने यहां अपना स्टॉल लगाया है। स्टॉल पर मौजूद विकास तिवारी ने बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से खुरचन पेड़ा बनाने के पारंपरिक कारोबार से जुड़ा है। शुद्ध देसी घी से तैयार होने वाला यह पेड़ा अपनी खास मिठास और स्वाद के लिए जाना जाता है।
विकास ने बताया कि इससे पहले उन्हें नोएडा में भी स्टॉल लगाने का मौका मिला था। दिवाली से पहले अयोध्या की इस पारंपरिक मिठाई को लखनऊ के लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय व्यंजनों को दूसरे जिलों और शहरों में पहचान बनाने का मौका मिलता है।
प्रदर्शनी में सिद्धार्थनगर का GI टैग प्राप्त काला नमक चावल भी खास पहचान बना रहा है। इसे बुद्ध चावल या बुद्धा ब्लेसिंग के नाम से भी जाना जाता है। सुजाता ट्रेडर्स की सुजाता ने बताया कि वह महिला उद्यमी हैं और सरकार से मिले सहयोग ने उन्हें अपना कारोबार शुरू करने और आगे बढ़ाने में मदद की।
उन्होंने बताया कि उनका चावल उज्बेकिस्तान समेत कई देशों में भेजा जा रहा है। दूसरे देशों में भी कारोबार को लेकर बातचीत चल रही है। सुजाता के मुताबिक, चार साल पहले वह TGT की तैयारी कर रही थीं, लेकिन बाद में उन्होंने काला नमक चावल के कारोबार में आने का फैसला किया। शुरुआत में किसानों से संपर्क करना और कारोबार को समझना आसान नहीं था। परिवार का सहयोग मिला और धीरे-धीरे काम आगे बढ़ा।
सुजाता ने कहा कि इस कारोबार से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का मौका मिला। काला नमक चावल को बुद्ध काल से जुड़ा माना जाता है। इसके पोषण संबंधी गुणों के कारण भी इसकी मांग बढ़ रही है। ODOP योजना के तहत सिद्धार्थनगर में इसकी खेती से जुड़े किसानों और खेती के क्षेत्र में भी बढ़ोतरी हुई है। अब यह चावल देश के साथ विदेशों के बाजारों तक पहुंच रहा है।