रीता राय सागर
असम की पारंपरिक ज्वेलरी क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास और अहोम काल को दर्शाती है। जूनबीरी और लोकापारो जैसे डिजाइन खास तौर पर पहचाने जाते हैं। इन आभूषणों का इस्तेमाल आज भी असम के पारंपरिक समारोहों और सांस्कृतिक आयोजनों में किया जाता है।
ओडिशा की तारकसी यानी सिल्वर फिलिग्री बेहद महीन चांदी के तारों से तैयार की जाती है। कारीगर इन पतले तारों को बारीकी से मोड़कर फूलों और अन्य पारंपरिक आकृतियों वाले जटिल डिजाइन बनाते हैं। इस कला का इतिहास करीब 800 साल पुराना माना जाता है।
गुलाबी मीनाकारी वाराणसी की पारंपरिक मेटलवर्क कला से जुड़ी है। इसमें सोने और चांदी के आभूषणों पर खास गुलाबी रंग की एनामेल वर्क की जाती है। फूलों और पशु-पक्षियों से प्रेरित डिजाइन इसके प्रमुख आकर्षण हैं।
तेलंगाना की करीमनगर सिल्वर फिलिग्री बेहद महीन और धागेनुमा चांदी के काम के लिए जानी जाती है। कारीगर इससे फूलों और ज्यामितीय आकृतियों वाले बारीक पैटर्न तैयार करते हैं। इस शिल्प को 2007 में GI पहचान मिली।
महाराष्ट्र के हुपरी क्षेत्र में चांदी के आभूषण बनाने की पुरानी परंपरा है। यहां की ज्वेलरी में पायल, चूड़ियां और घुंघरू जैसे आभूषण खास पहचान रखते हैं। पीपल, चंपक और अंबी जैसे पारंपरिक मोटिफ भी डिजाइन में दिखाई देते हैं।
प्रतापगढ़ की थेवा ज्वेलरी सोने की बारीक नक्काशीदार शीट को रंगीन कांच पर सावधानी से फ्यूज करके बनाई जाती है। इसके डिजाइन में राजसी जीवन, प्रकृति, शिकार और लोककथाओं से प्रेरित दृश्य देखने को मिलते हैं।
हैदराबाद का लाड बाजार रंग-बिरंगी लाक की चूड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इस शिल्प की जड़ें शहर की कुतुब शाही विरासत से जुड़ी मानी जाती हैं। गर्म करके लाक को आकार दिया जाता है और फिर चूड़ियों को रंगीन पत्थरों व अन्य सजावटी चीजों से सजाया जाता है।
नागरकोइल टेंपल ज्वेलरी की परंपरा मंदिरों में इस्तेमाल होने वाले आभूषणों से जुड़ी मानी जाती है। इसके डिजाइन में देवी-देवताओं, मंदिरों और वास्तुशिल्प से प्रेरित आकृतियां दिखाई देती हैं। यह ज्वेलरी खास तौर पर शास्त्रीय नृत्य और ब्राइडल लुक में लोकप्रिय है।
गुजरात के खंभात, जिसे ऐतिहासिक रूप से कैंबे कहा जाता था, में अगेट पत्थरों को काटने और तराशने की पुरानी परंपरा है। इस क्षेत्र की लैपिडरी कला का संबंध हजारों साल पुरानी परंपराओं से है और इसके तार हड़प्पा काल से जुड़े हैं।
ओडिशा की पारंपरिक ढोकरा तकनीक लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग पर आधारित है। इससे पीतल और बेल मेटल के आकर्षक आभूषण बनाए जाते हैं। आदिवासी समुदायों से जुड़ी यह ज्वेलरी अपने बोल्ड डिजाइन के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के लिए भी जानी जाती है।