राजेंद्र पाल गौतम को लेकर सपा-कांग्रेस में बढ़ा तनाव, मुलाकात और वायरल चिट्ठियों से हलचल

SP Congress Seat Sharing: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे, राजेंद्र पाल गौतम की स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात और वायरल कथित चिट्ठियों को लेकर सियासी चर्चा तेज है।
SP-Congress Alliance Under Scrutiny Ahead of UP Assembly Elections 2027
राजेंद्र पाल गौतम (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात, अखिलेश की नाराजगी

  • राजेंद्र पाल गौतम की वायरल चिट्ठियों ने बढ़ाई हलचल

  • सपा-कांग्रेस गठबंधन में राजेंद्र पाल गौतम क्यों बने तनाव की वजह

Rajendra Pal Gautam-SP Congress Alliance: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। सीटों के बंटवारे को लेकर जारी चर्चाओं के बीच कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम लगातार सुर्खियों में हैं। कभी कांग्रेस की सीटों की हिस्सेदारी को लेकर उनके बयान चर्चा में आते हैं तो कभी सपा प्रमुख अखिलेश यादव की आपत्ति के बावजूद स्वामी प्रसाद मौर्य से उनकी मुलाकात राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। अब सोशल मीडिया पर वायरल कथित चिट्ठियों में टिकट के बदले पैसे मांगने के आरोपों ने इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, इन आरोपों और चिट्ठियों की स्वतंत्र पुष्टि नवभारत नहीं करता है।

इससे पहले भी राजेंद्र पाल गौतम एक अन्य कांग्रेस सांसद के साथ लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात करने पहुंचे थे। हालांकि, मायावती ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और दोनों नेताओं को बिना मुलाकात किए ही वापस लौटना पड़ा था। इसके बाद भी राजनीतिक बहस शुरू हो गई थी।

वायरल पत्र
वायरल पत्र(सोर्स-सोशल मीडिया)
SP-Congress Alliance Under Scrutiny Ahead of UP Assembly Elections 2027
‘13 करोड़ वोट चोरी नहीं, मतदाता सूची का शुद्धिकरण है SIR’, संबित पात्रा का विपक्ष पर हमला

स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात पर क्यों बढ़ा विवाद?

ताजा विवाद कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की मुलाकात के बाद शुरू हुआ। स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की जानकारी दी। यह मुलाकात इसलिए अहम हो गई, क्योंकि इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य को गठबंधन का हिस्सा मानने से इनकार कर चुके थे।

30 अक्टूबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था कि मौर्य उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और सपा की सीटों के बंटवारे में उनकी कोई हिस्सेदारी नहीं होगी। अखिलेश के इस बयान को मौर्य की गठबंधन में संभावित भूमिका पर सपा की असहमति के तौर पर देखा गया।

इसके बाद जब राजेंद्र पाल गौतम ने स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात की तो सियासी हलकों में सवाल उठने लगे कि क्या कांग्रेस सपा की आपत्तियों से अलग अपनी रणनीति तैयार कर रही है?

गौतम बोले क्या राजनीति के लिए सामाजिक जीवन छोड़ दूं

मुलाकात पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने इसका बचाव किया। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके पुराने मित्र और सामाजिक न्याय की लड़ाई के साथी हैं। राजनीति अपनी जगह है और सामाजिक जीवन अपनी जगह। क्या राजनीति के कारण वह अपने मित्रों और सामाजिक मुद्दों से जुड़े लोगों से मिलना बंद कर दें।

SP-Congress Alliance Under Scrutiny Ahead of UP Assembly Elections 2027
यूपी चुनाव से पहले BJP प्रकोष्ठ संकुलों की बैठक में हुआ फैसला, वोटर लिस्ट पर नजर, हर वर्ग तक पहुंचने का टारगेट

गौतम ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच क्या मतभेद हैं, यह दोनों का अपना मामला है। उन्हें आपस में बैठकर इसे सुलझाना चाहिए। उन्होंने मुलाकात को व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों से जोड़ते हुए कहा कि किससे मिलना है, यह उनका अपना अधिकार है।

150 से 200 सीटों की मांग ने भी बढ़ाई थी सियासी गर्मी

स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात अकेला ऐसा मामला नहीं है, जिसको लेकर राजेंद्र पाल गौतम और सपा के बीच असहजता की चर्चा हो रही है। इससे पहले 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटों की हिस्सेदारी को लेकर भी उनके बयान सुर्खियों में रहे हैं।

गौतम की ओर से 150 से 200 सीटों की मांग और सम्मानजनक हिस्सेदारी की बात सामने आने के बाद सपा नेताओं की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आईं। इससे गठबंधन में सीटों के तालमेल को लेकर सवाल खड़े हुए।

वायरल चिट्ठियों में टिकट के बदले पैसे मांगने के आरोप

इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ कथित चिट्ठियां और ईमेल वायरल हुए हैं। इनमें राजेंद्र पाल गौतम और उनके कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों पर विधानसभा चुनाव के टिकट के बदले पैसे मांगने और पद दिलाने के नाम पर रकम वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

वायरल ईमेल में कुछ सहयोगियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है। कथित शिकायत में टिकट के बदले रकम मांगने, कुछ विधानसभा सीटों पर आर्थिक लेनदेन और अन्य तरह के लाभ लेने के दावे किए गए हैं। इन आरोपों को लेकर कांग्रेस के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा होने की बात सामने आई है।

हालांकि नवभारत वायरल चिट्ठियों की प्रामाणिकता, उनके लेखक की पहचान और उनमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।

क्या सपा-कांग्रेस के बीच दरार बढ़ाने की कोशिश है?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या राजेंद्र पाल गौतम की स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात महज सामाजिक संबंधों तक सीमित है या इसके पीछे 2027 के चुनाव को लेकर कोई व्यापक राजनीतिक रणनीति भी है? क्या कांग्रेस सपा से अलग कुछ नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है?

रिपोर्ट- ईशांक दीक्षित

SP-Congress Alliance Under Scrutiny Ahead of UP Assembly Elections 2027
फतेहपुर में BJP मंत्री की बड़ी बहन को पीटा, कपड़े फाड़े, दबंगों ने फायरिंग भी की

इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी के साथ संभावित समझौते को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, कांग्रेस और बसपा के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि गौतम की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव रखा गया है या नहीं।

राजनीतिक शतरंज या कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति?

राजेंद्र पाल गौतम को लेकर उठे सवाल अब केवल स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात तक सीमित नहीं रह गए हैं। एक तरफ अखिलेश यादव की ओर से मौर्य को गठबंधन में जगह नहीं देने का बयान है, दूसरी तरफ कांग्रेस प्रभारी का उनके साथ मुलाकात का बचाव करना है। इसके साथ ही सीटों की हिस्सेदारी और वायरल कथित चिट्ठियों ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सपा के साथ सीट बंटवारे को लेकर क्या रुख अपनाता है और वायरल आरोपों पर पार्टी या संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है या नहीं।