योगी सरकार ने आयुष चिकित्सा को दी नई पहचान, साढ़े नौ साल में मजबूत हुआ बुनियादी ढांचा

Uttar Pradesh AYUSH Medical: योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथी चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए। गोरखपुर में पहला आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किया गया।
Scope of AYUSH healthcare expands in UP
यूपी में आयुष चिकित्सा का बढ़ा दायरा(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • प्रदेश में 1,034 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और 225 योग केंद्र संचालित

  • 50 बेड वाले 16 एकीकृत आयुष अस्पताल पूरी तरह संचालित

  • गांवों और कस्बों तक आयुष चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर

AYUSH healthcare Scope Expands: योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को नई पहचान देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों को जनसामान्य तक पहुंचाने के साथ इनके शैक्षणिक, चिकित्सकीय और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत स्वरूप देने के लिए वर्ष 2017 में अलग आयुष विभाग का गठन किया गया।

इसके माध्यम से आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी सेवाओं को एक ही प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत लाकर इनके विकास, विस्तार और बेहतर संचालन का रास्ता तैयार किया गया। इससे पहले ये सेवाएं अलग-अलग विभागीय व्यवस्थाओं के तहत संचालित होती थीं। योगी सरकार ने आयुष चिकित्सा को केवल परंपरागत उपचार तक सीमित न रखते हुए इसे स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम किया।

प्रदेश को मिला पहला आयुष विश्वविद्यालय

प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार ने बताया कि आयुष चिकित्सा शिक्षा को एक नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इसकी आधारशिला अगस्त-21 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रखी थी। करीब 52 एकड़ में विकसित विश्वविद्यालय का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जुलाई-25 को किया था।

यह प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय है, जिसके माध्यम से आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा को एकीकृत व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय से करीब 100 आयुष महाविद्यालय संबद्ध हैं। यहां बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस सहित स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों की शिक्षा और परीक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में चिकित्सा सेवाओं के साथ शोध और गुणवत्तापूर्ण आयुष शिक्षा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

50 बेड के एकीकृत आयुष अस्पतालों का विस्तार

आयुष चिकित्सा सुविधाओं को जिला स्तर तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने एकीकृत आयुष अस्पतालों के निर्माण पर विशेष जोर दिया है। इन अस्पतालों में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। दिसंबर 2021 में प्रदेश के आठ शहरों में 50 बेड के एकीकृत आयुष अस्पतालों का उद्घाटन किया गया था।

इसके साथ ही छह नए अस्पतालों की स्थापना की घोषणा की गई। प्रदेश में 16 पचास बेड वाले एकीकृत आयुष अस्पताल पूरी तरह संचालित हैं। इसके अतिरिक्त बुलंदशहर, फतेहपुर, हरदोई और उन्नाव में चार अन्य अस्पतालों का निर्माण लगभग पूरा होने की जानकारी दी गई है। मेरठ में 50 बेड और जौनपुर में 30 बेड के एकीकृत आयुष अस्पताल का निर्माण भी जारी है।

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1,034 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, 225 योग केंद्र

योगी सरकार ने आयुष चिकित्सा को गांवों और कस्बों तक पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का विस्तार किया है। इन केंद्रों के माध्यम से आयुर्वेदिक परामर्श, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और रोगों से बचाव के उपायों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रदेश में अब 1034 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और 225 योग वेलनेस सेंटर स्थापित किये जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित योगाभ्यास करने और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। आयुष चिकित्सा को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ना भी इस पहल का अहम हिस्सा है।

3,968 क्लीनिक, अस्पताल और डिस्पेंसरी से मिल रही सुविधा

आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए सरकारी अस्पतालों और औषधालयों के नेटवर्क को भी मजबूत किया गया है। प्रदेश में कुल 3968 क्लीनिक, अस्पताल और डिस्पेंसरी हैं। इनके माध्यम से विभिन्न आयुष पद्धतियों में उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत सरकारी आयुष अस्पतालों और औषधालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में आयुष चिकित्सा सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था से मरीजों को उपचार के विकल्प मिल रहे हैं।

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