

Kanpur Municipal Corporation Tender Scam: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फटकार के बाद नगर निगम के अधिकारियों की नींद खुली जिसके बाद आनन फानन में नगर निगम में हो रहे टेंडर घोटाले से जुड़ी 6 एफआईआर दर्ज करा दी गई जिसमें पांच स्वरूप नगर थाने में दर्ज हुई वहीं एक एफआईआर फजलगंज थाने में दर्ज हुई।
पुलिस आयुक्त ने प्रेसवार्ता कर जानकारी दी थी कि इस पूरे टेंडर घोटाले का मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा है जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगाई गई है। गोविंद शर्मा की तलाश के लिए राजस्थान तक पुलिस टीम लगी हुई थी।
फजलगंज थाने में दर्ज मुकदमे को चुनौती देते हुए गोविंद शर्मा ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी जिसमें गोविंद शर्मा के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने एफआईआर को व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी के बीच विवाद के कारण दर्ज होना बताया गया था।
गोविंद शर्मा द्वारा दाखिल की गई रिट याचिका पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने गोविंद शर्मा को राहत देते हुए फजलगंज थाने में दर्ज एफआईआर में पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक या उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई तक गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। सरकार के अधिवक्ता से चार हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
टेंडर घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जा रहे गोविंद शर्मा को उच्च न्यायालय से राहत तो मिल गई लेकिन कानपुर कमिश्नरेट की हाईटेक पुलिस फेल साबित हुई। जिस मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम लगी हुई थी। पुलिस का दावा था कि मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने के लिए राजस्थान तक पुलिस गई है। वह मास्टरमाइंड प्रयागराज में रहकर उच्च न्यायालय में अपने विरुद्ध दर्ज एफआईआर को चुनौती दे रहा था लेकिन कानपुर कमिश्नरेट की हाईटेक पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी फिलहाल मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है लेकिन उच्च न्यायालय ने मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा से पुलिस की जांच में सहयोग करने का भी आदेश किया है।