

High Court Guidelines On Article 226 FIR: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर सीधे हाईकोर्ट पहुंचने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में तथ्यों को लेकर विवाद हो, वहां संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सीधे एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में पहले मजिस्ट्रेट की अदालत का रुख करना वैकल्पिक और उचित उपाय है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी अमित कुमार श्रीवास्तव की याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
याची के अनुसार, एक अगस्त 2025 की शाम करीब सात बजे वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान रहीमापुर के पास दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार अज्ञात लोगों ने उनकी कार पर फायरिंग कर दी। गोली कार में लगी, जबकि याची बाल-बाल बच गए। याची ने आरोप लगाया कि हमला अतीक अहमद गिरोह से जुड़े भू-माफिया के इशारे पर कराया गया, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि थानाध्यक्ष आरोपी पक्ष से मिले हुए हैं। हालांकि, अपर शासकीय अधिवक्ता ने याची के आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया। पुलिस की जांच में भी घटना की पुष्टि नहीं हुई।
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में याची और उसके साथी पेट्रोल पंप पर सामान्य रूप से रुके दिखाई दिए। किसी हड़बड़ी के संकेत नहीं मिले। कार पर मिले गोली के निशान भी संदिग्ध पाए गए। सहायक पुलिस आयुक्त की स्वतंत्र जांच में भी आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने कहा कि याची को सुरक्षा संबंधी शिकायत होने पर नियमानुसार उपलब्ध उपाय अपनाने चाहिए।
इसी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश में तीन नई खुली जेलें बनाए जाने के प्रस्ताव पर भी राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। जेल मुख्यालय की ओर से बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में तीन नई खुली जेलें बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। इनकी अनुमानित लागत करीब 90 करोड़ रुपये होगी। कोर्ट ने इस संबंध में पांच अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।