सतीश महाना पर अभद्र पोस्ट पड़ गई भारी! BJP नेता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, अकाउंट संचालक की तलाश में साइबर सेल

Satish Mahana News: कानपुर में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर FIR दर्ज कर लिया गया है। भाजपा पदाधिकारी की शिकायत पर नौबस्ता पुलिस व साइबर सेल जांच कर रही है।
Satish Mahana Objectionable Post Kanpur FIR
यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महानासोर्स- सोशल मीडिया
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Satish Mahana Objectionable Post Kanpur FIR: उत्तर प्रदेश के कानपुर में विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश महाना को लेकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। मामले में नौबस्ता थाने में एक सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। भाजपा के सहकोषाध्यक्ष लालजी तिवारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट का संचालन कौन कर रहा था और कथित पोस्ट किस स्थान से प्रकाशित की गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के संबंध में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसे अपमानजनक और आपत्तिजनक माना जा सकता है। भाजपा पदाधिकारी ने पुलिस से मामले की जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

सोशल मीडिया अकाउंट संचालक की तलाश

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच का प्रमुख बिंदु संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट का संचालक है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अकाउंट किस व्यक्ति के नाम या पहचान से संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा पुलिस कथित पोस्ट की तारीख और समय की भी जांच कर रही है। डिजिटल माध्यम से की गई किसी भी पोस्ट की जांच में उसके तकनीकी विवरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित उपलब्ध जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है।

पुलिस की साइबर टीम की मदद से अकाउंट के संचालन से जुड़े तकनीकी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। जांच के दौरान यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि संबंधित अकाउंट वास्तविक व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा था या किसी अन्य पहचान का इस्तेमाल किया गया था।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से जुड़ा मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक मतभेद या आलोचना अपनी जगह हो सकती है, लेकिन सोशल मीडिया पर किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। भाजपा की ओर से शिकायत करने वाले पदाधिकारी ने पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

दूसरी ओर, पुलिस का मुख्य फोकस फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पर है। पुलिस यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि कथित पोस्ट वास्तव में किस अकाउंट से प्रकाशित हुई और उसके पीछे कौन व्यक्ति था।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की साइबर टीम डिजिटल साक्ष्यों को जुटाने और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट के संचालक की पहचान करने की कोशिश कर रही है। मामले में अभी तक किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि कथित पोस्ट किस व्यक्ति ने की थी।

पुलिस के सामने चुनौती

पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों के मामलों में पुलिस के सामने चुनौती यह भी रहती है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री के बीच अंतर स्पष्ट किया जाए। ऐसे में जांच के दौरान पोस्ट की वास्तविक प्रकृति, उसके संदर्भ और उसे प्रकाशित करने वाले व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। कानपुर के नौबस्ता थाने में दर्ज इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर जिम्मेदार तरीके से सामग्री साझा करने के महत्व को सामने ला दिया है।

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फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित पोस्ट के लिए कौन जिम्मेदार है और मामले में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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