

Kanpur Medical Negligence Case: कानपुर में झोलाछाप डॉक्टरो ने अपना मकड़जाल फैला रखा है। ग्रामीण क्षेत्र के मरीज उनके जाल में फसते हैं और अपनी जान का दांव लगाते हुए इलाज कराते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें महिला मरीज का 4 महीने पहले ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद भी जब दर्द ठीक नहीं हुआ तो एक एमबीबीएस डॉक्टर से मरीज का दोबारा ऑपरेशन कराया गया जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मरीज के पेट से तौलिया निकाला गया। मुख्यमंत्री से शिकायत की गई।
कानपुर देहात के मनेतू सरवन खेड़ा के रहने वाले वीरेंद्र की पत्नी सोनी के पेट में चार महीने पूर्व दर्द उठा था। इसके बाद जब वीरेंद्र ने अपनी पत्नी को पास के ही एक डॉक्टर से दिखाया तो उन्होंने कानपुर नगर के मकसूदाबाद स्थित डॉक्टर अजय कुमार के ओम शांति हॉस्पिटल रेफर कर दिया। ओम शांति हॉस्पिटल में वीरेंद्र को बताया गया कि उसकी पत्नी की पेट की ट्यूब फट गई है और तत्काल ऑपरेशन करना पड़ेगा।
इस दौरान ऑपरेशन की फीस डेढ़ लाख रुपये ली गई जबकि वीरेंद्र के पास आयुष्मान कार्ड भी था। डॉ अजय कुमार ने फीस लेने के बाद मरीज को कल्याणपुर स्थित विश्वास हॉस्पिटल में रेफर किया और विश्वास हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर में सोनी का 10 जून को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद लगभग 1 लाख रुपए की दवाइयां वीरेंद्र को दी गई और उसकी पत्नी को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
ऑपरेशन के बाद भी सोनी को आराम नहीं मिला। उसके पेट में लगातार दर्द बना रहा। इस दौरान उसके पेट से मवाद निकलने लगा जिससे वीरेंद्र घबरा गया और उसके बाद वीरेंद्र ने डॉक्टर दिनेश को अपनी पत्नी सोनी को दिखाया। जिसके बाद डॉक्टर दिनेश ने तत्काल दोबारा ऑपरेशन के लिए कहा। डॉक्टर दिनेश से ऑपरेशन कराने के दौरान मरीज की वीडियोग्राफी की गई। इस दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
सोनी के पेट से तौलिया निकाली गई जिससे साफ जाहिर है कि पूर्व में कराए गए ऑपरेशन के दौरान ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर ने मरीज सोनी के पेट में लापरवाही बरतते हुए तौलिया छोड़ दिया। जिससे सोनी की जान भी जा सकती थी, हालांकि डॉक्टर दिनेश ने सोनी का सफल ऑपरेशन कर तौलिया तो बाहर निकाल दिया लेकिन सोनी की स्थिति गंभीर है और उसका इलाज अभी भी कानपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र की बात करें तो यहां गली-गली में ही मानक के विपरीत अस्पताल खुले हुए हैं। किसी भी अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं रहते। झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से आए दिन इन अस्पतालों में किसी न किसी मरीज की जान जाती है। इसके बाद हंगामा होता है, मुकदमा लिखा जाता है और स्वास्थ्य विभाग फिर भी कोई कार्रवाई नहीं करता। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े कर रही है, इस मामले में भी यही हुआ। ओम शांति अस्पताल का डॉक्टर अजय कुमार झोलाछाप है। जिस विश्वास हॉस्पिटल में मरीज का ऑपरेशन किया गया वहां किस डॉक्टर ने किया यह भी मरीज को नहीं पता। झोलाछापों के भरोसे स्वास्थ्य विभाग की नाव चल रही है तो फिर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई क्यों करेगा।