नहर में बहता प्लास्टिक रोकेगा ‘ट्रैश बूम’, बिल्हौर देहात ने पेश किया कचरा प्रबंधन का मॉडल

Bilhaur Dehat Gram Panchayat: बिल्हौर देहात में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का इंटीग्रेटेड मॉडल विकसित हुआ है। ट्रैश बूम से नहर का प्लास्टिक रोका जा रहा है और बिक्री से पंचायत को ₹72 हजार से अधिक आय हुई।
Kanpur  Bilhaur Dehat Develops Integrated Plastic Waste Management Model with Trash Boom Technology
‘ट्रैश बूम’(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Kanpur Plastic Waste Management: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत बिल्हौर देहात ग्राम पंचायत में प्लास्टिक एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का इंटीग्रेटेड मॉडल विकसित किया गया है। यहां पांच विकास खंडों की ग्राम पंचायतों से निकलने वाले प्लास्टिक का प्रबंधन करने के साथ नहर में बहकर आने वाले प्लास्टिक को रोकने के लिए ‘ट्रैश बूम’ तकनीक का भी प्रयोग किया गया है। प्लास्टिक विक्रय से अब तक 72 हजार रुपये से अधिक की धनराशि ग्राम पंचायत की स्वयं की आय (ओएसआर) में जमा हो चुकी है।

ग्राम पंचायत का चयन वित्तीय वर्ष 2022-23 में ओडीएफ प्लस की मॉडल श्रेणी में विकसित करने के लिए किया गया था। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 में इंटीग्रेटेड अप्रोच के तहत प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर विकसित किया गया। परियोजना शुरू होने से पहले सड़क किनारे कूड़ा जमा होने और प्लास्टिक के कारण नालियां चोक होने की समस्या रहती थी। इससे ग्रामीण स्वच्छता एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।

नहर में प्लास्टिक को आगे बहने से रोक रहा ‘ट्रैश बूम’

प्लास्टिक अपशिष्ट के नियमित बैकवर्ड लिंकेज के लिए स्वच्छ प्रवाह संस्था एवं प्लास्टिक फिशर्स के सहयोग से जून 2026 में अलियापुर नहर पर ‘ट्रैश बूम’ स्थापित किया गया। यह व्यवस्था पानी के साथ बहकर आने वाले प्लास्टिक अपशिष्ट को आगे जाने से रोककर एक स्थान पर एकत्र करती है।

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ट्रैश बूम के माध्यम से प्रतिदिन अनुमानित 150 किलोग्राम प्लास्टिक एकत्र किया गया। पिछले दो माह में इससे 8 टन से अधिक प्लास्टिक अपशिष्ट नहर से निकाला जा चुका है। एकत्र प्लास्टिक की बेलिंग के बाद उसे रीसाइक्लिंग अथवा को-प्रोसेसिंग के लिए भेजने की प्रक्रिया चल रही है। वर्तमान में नहर का जलस्तर बढ़ने के कारण ट्रैश बूम को अस्थायी रूप से हटा लिया गया है। जलस्तर कम होने पर इसे पुनः स्थापित किया जाएगा।

16 लाख रुपये से स्थापित हुई प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना के लिए ग्राम पंचायत को 16 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई। इससे यूनिट शेड का निर्माण किया गया तथा जेम पोर्टल के माध्यम से नियमानुसार फटका मशीन, बेलिंग मशीन एवं श्रेडिंग मशीन खरीदी गईं।

यूनिट में प्राप्त प्लास्टिक को फटका मशीन से साफ करने के बाद बेलिंग कर को-प्रोसेसिंग के लिए तैयार किया जाता है। गत माह तक विभिन्न विकास खंडों से करीब 40 टन प्लास्टिक अपशिष्ट यूनिट पर प्राप्त हो चुका है।

यूनिट से ककवन, चौबेपुर, शिवराजपुर, कल्याणपुर और बिल्हौर विकास खंडों की समस्त ग्राम पंचायतों को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मैप किया गया है। इस तरह एक यूनिट को पांच विकास खंडों में उत्सर्जित होने वाले ग्रामीण प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रबंधन से जोड़ा गया है।

कबाड़ियों को जोड़कर बिजनेस मॉडल, ₹72 हजार से अधिक की आय

यूनिट के संचालन के लिए ग्राम पंचायत ने करीब एक वर्ष पूर्व ‘स्वच्छ प्रवाह’ संस्था के साथ अनुबंध किया। ग्राम पंचायत में एकत्र होने वाले प्लास्टिक के साथ स्थानीय कबाड़ियों को भी जोड़कर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को बिजनेस मॉडल के आधार पर संचालित किया जा रहा है।

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अब तक प्लास्टिक विक्रय से 72 हजार रुपये से अधिक की धनराशि ग्राम पंचायत के ओएसआर में जमा की जा चुकी है। इससे प्लास्टिक के व्यवस्थित निस्तारण के साथ ग्राम पंचायत के लिए स्वयं की आय का स्रोत भी तैयार हुआ है।

गीले कचरे और गोबर से तैयार हो रही खाद

ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट एवं नाडेप के माध्यम से गीले कचरे, विशेष रूप से गोबर से कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार की जा रही है। तैयार खाद को 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। इससे गीले एवं ठोस कचरे का व्यवस्थित निस्तारण होने के साथ पंचायत को अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।

डीपीआरओ मनोज कुमार ने बताया कि बिल्हौर देहात में स्वच्छता को केवल कचरा उठान तक सीमित न रखकर उसके वैज्ञानिक प्रबंधन और आय सृजन से जोड़ा गया है। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के साथ नहर में ट्रैश बूम का प्रयोग इस मॉडल की विशेषता है। इससे जलस्रोत में बहकर आने वाले प्लास्टिक को रोककर उसका भी व्यवस्थित निस्तारण किया जा रहा है। प्रयास है कि इस मॉडल के सफल प्रयोगों को अन्य ग्राम पंचायतों में भी स्थानीय आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जाए।

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