

IIT Kanpur And CISF Cybersecurity Training: कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र C3iHub और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने विशेष प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत CISF कर्मियों के लिए छह हफ़्ते का आवासीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण IIT कानपुर परिसर में आयोजित किया जाएगा।
इस सहयोग का उद्देश्य तेजी से बदलते साइबर खतरों को देखते हुए CISF कर्मियों के तकनीकी ज्ञान, कामकाज़ी तैयारी के लिए उनकी रणनीति और साइबर सुरक्षा से जुड़ी क्षमताओं को और मज़बूत करना है। देशभर की रणनीतिक और महत्वपूर्ण सुविधाओं की सुरक्षा में CISF की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए, इस कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातों और आधुनिक सुरक्षा कार्यों से जुड़ी नई तकनीकों की व्यावहारिक समझ मिल सके।
प्रत्येक बैच में CISF के 40 कर्मियों के लिए आयोजित यह छह हफ़्ते का आवासीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम कक्षा में व्यवस्थित प्रशिक्षण, व्यावहारिक अभ्यास, विशेषज्ञों द्वारा लिए जाने वाले सत्र और अलग-अलग परिस्थितियों पर आधारित गतिविधियों को शामिल किया जायेगा। कार्यक्रम की शुरुआत आईटी और नेटवर्किंग की बुनियादी अवधारणाओं से होगी। इसके बाद प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा और साइबर घटनाओं के प्रबंधन से जुड़े विशेष विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण पूरी तरह गैर-व्यावसायिक आधार पर आयोजित होगा और इसके लिए प्रतिभागियों से कोई प्रशिक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
समझौता ज्ञापन पर CISF के आईजी/एपीएस-I श्री सेंथिल अवूदय कृष्ण राज एस. और C3iHub की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. तनीमा हाजरा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कार्यक्रम निदेशक प्रो. सुरेंदर बसवाना, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. रास द्विवेदी, मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. आनंद हांडा तथा मुख्य वित्त अधिकारी श्री अजय कुमार मिश्रा मौजूद रहे।
प्रशिक्षण में आईटी और नेटवर्किंग, साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी, डिजिटल फ़ॉरेंसिक, साइबर घटना सम्बंधित जानकारी, सुरक्षा कमज़ोरियों की पहचान, सेवाओं को बहाल करना और काम लगातार जारी रखे जाने जैसे अहम विषय शामिल होंगे; जिससे प्रतिभागियों को साइबर खतरों को बेहतर ढंग से समझने और उनसे निपटने के सही तरीकों की जानकारी मिलेगी।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को उभरती तकनीकों और उनसे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों की भी जानकारी दी जाएगी। इसमें क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग, जेनरेटिव AI, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) शामिल हैं। प्रतिभागी समझ पाएंगे कि ये तकनीकें साइबर खतरों के स्वरूप को कैसे बदल रही हैं और इन्हें अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
कार्यक्रम में नए साइबर खतरों और साइबर हमलों के तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी। इसमें एआई के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरे, फ़र्ज़ी वीडियो या ऑडियो (डीपफ़ेक), क्लाउड पर डेटा की सुरक्षा से जुड़े जोखिम, सप्लाई चेन में मौजूद कमजोरियां, पहचान की चोरी और जुड़े हुए डिजिटल सिस्टम से होने वाले जोखिम शामिल होंगे। इस प्रशिक्षण के माध्यम से CISF कर्मी बदलते साइबर खतरों को समय रहते पहचानने और गंभीर साइबर घटनाओं के दौरान सही कदम उठाने के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे।
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा व्यावहारिक अभ्यास और ख़तरे की स्थितियों पर आधारित गतिविधियां शामिल होंगी। इस अभ्यास में प्रतिभागियों के सामने वास्तविक जीवन जैसी एक साइबर हमले की स्थिति बनाई जाएगी, जिसमें वे प्रशिक्षण में सीखी गयी बातों का इस्तेमाल करके, समय पर सही फ़ैसले लेने और अलग-अलग टीमों के साथ मिलकर काम करने का अभ्यास करेंगे। साथ ही, वे समझेंगे कि बड़े साइबर हमलों से निपटना कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
यह समझौता ज्ञापन C3iHub, IIT कानपुर और CISF की साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर्मियों को विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सहयोग सुरक्षा बलों की साइबर खतरों से निपटने की तैयारी को मजबूत करेगा और उभरते साइबर खतरों से भारत की महत्वपूर्ण तथा रणनीतिक सुविधाओं की सुरक्षा में मदद करेगा।
C3iHub, IIT कानपुर में स्थापित एक प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र है। इसकी स्थापना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फ़िज़िकल सिस्टम्स के अंतर्गत की गई है। यह केंद्र साइबर-फिजिकल प्रणालियों की सुरक्षा पर कार्य करता है। C3iHub कमजोरियों की पहचान, सुरक्षा उपकरणों के विकास, स्टार्टअप को प्रोत्साहन और साइबर सुरक्षा पेशेवरों की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है।
1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 21 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 590 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।