

Meerut Central Market Demolition: यूपी में मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के अनुपालन में बुधवार की सुबह अवैध निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ आवास विकास परिषद और पुलिस, प्रशासन का बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। बुधवार सुबह-सुबह ही भारी मात्रा में पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई आरंभ की गई।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बीच नई सड़क से लेकर सेक्टर-6 तक पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया और चप्पे-चप्पे पर बैरिकेडिंग कर घेराबंदी कर दी गई। जिन 44 चिन्हित और सील किए गए ऐसे भवनों व व्यावसायिक परिसरों में कोर्ट के आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया है और तय समय सीमा में अवैध हिस्से नहीं हटाए गए, वहां आवास विकास परिषद द्वारा ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई की जा रही है।
सुबह 9.30 बजे मेरठ शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में सुबह ही अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू किया गया। आवास एवं विकास परिषद की टीम पुलिस-प्रशासन के साथ मौके पर पहुंची है। हालांकि व्यापारियों का समूह लगातार इस ध्वस्तीकरण का विरोध करता आ रहा है। धरना अभी तक जारी है।
आरोप है कि कई जगह लैंड यूज़ नियमों का उल्लंघन करते हुए आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 44 से अधिक व्यावसायिक इमारतों को हटाने की कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। वहीं आवासीय भवनों को स्वीकृत नक्शे के मुताबिक आवश्यक सेटबैक के साथ व्यवस्थित किए जाने की प्रक्रिया भी बताई गई है।
अधिकारियों ने बताया कि शास्त्री नगर के सेक्टर 3 में 4 भवनों पर कार्रवाई चल रही है। इसके अलावा सेक्टर 2 और सेक्टर 6 के एक एक भवन पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है।
नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्री नगर सेक्टर-6 और सेंट्रल मार्केट में अवैध मार्केट और मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई जारी है। कार्रवाई के मद्देनजर सेक्टर-6 को छावनी में तब्दील करते हुए इलाके में बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन को 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना है। सेंट्रल मार्केट मामले में 21 सितंबर को सुनवाई होनी है। परिषद को 44 सील भवनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसके चलते परिषद ने आदेश के अनुपालन में कार्रवाई शुरू की है।
44 सील भवनों में से उन 6 भवनों के अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जा रही जिन भवनों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है। कार्रवाई से पहले ही पुलिस प्रशासन ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है।
आवास विकास परिषद को 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना है, जिसमें पिछली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर हुई कार्रवाई की स्थिति बतानी है। साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के सेंट्रल मार्केट में मौजूद अवैध निर्माणों को हटाने के आदेश दिए थे। शास्त्री नगर आवासीय योजना की इस कॉलोनी में पिछले करीब दो दशकों में कई रेजिडेंशियल प्लॉट्स पर बड़े-बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, शोरूम और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े हो गए।
सुबह-सुबह अचानक शुरू हुई इस भारी प्रशासनिक कार्रवाई और बुलडोजर एक्शन से सेंट्रल मार्केट और आसपास के दुकानदारों व व्यापारियों में अफरा-तफरी का माहौल है। हालांकि कुछ स्थानों पर भवन स्वामी खुद भी नियमों के तहत अपना अवैध हिस्सा हटाते नजर आए हैं।
प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है और अवैध निर्माणों के खिलाफ यह अभियान नियमों के तहत लगातार जारी रहेगा। अब 21 सितंबर को कार्रवाई रिपोर्ट दी जानी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस कड़े आदेश के बाद तेज हुई है, जिसमें आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करने और नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माणों को ढहाने के निर्देश दिए गए हैं।
मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा ने कहा कि शास्त्री नगर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज हो रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में मैं व्यापारियों और प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होने के लिए सेंट्रल मार्केट जाने के लिये घर से निकला था। लेकिन पुलिस प्रशासन ने मुझे मेरे आवास से निकलते समय ही रोक दिया और बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरा उद्देश्य किसी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के व्यापारियों और आम नागरिकों की आवाज़ उठाना है। इस प्रकार हम नेताओ को घर पर रोक देना कोई समाधान नही बल्कि तानाशाही है।