भदोही में India Carpet Expo के स्वर्ण जयंती संस्करण का आगाज, CM ने किया उद्घाटन; 65 देशों के बायर्स पहुंचे

India Carpet Expo 2026: इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ हुआ। सीएम योगी ने भदोही में सिल्क क्लस्टर विकसित करने और वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान लागू करने की बात कही।
India Carpet Expo 2026: CM Yogi Announces Silk Cluster Development in Bhadohi, Mirzapur and Varanasi
इंडिया कारपेट एक्सपो उद्घाटन समारोह में सीएम योगी(सोर्स- फोटो नवभारत)
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India Carpet Expo Golden Jubilee: दुनिया भर के 65 देशों से आए 450 से अधिक बायर्स और लगभग 250 एग्जीबिटर्स की भागीदारी के साथ उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी के नाम से मशहूर भदोही में इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण की शुरूआत हुई।

इस बार के एक्सपो में ब्रिक्स देशों से आए 106 खरीदार हिस्सा ले रहे हैं जबकि बड़ी तादाद में घरेलू खरीदार भी शामिल हैं। रविवार को कारपेट एक्सपो में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी जिले सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने एक बार फिर से भदोही जिले की नाम बदल कर संत रविदास नगर करने का भी एलान किया।

इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों से सीधे संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान भी जल्द लागू होगा। उद्यमियों ने कालीन उद्योग के लिए अलग नीति, कारोबार की जरूरतों और महिला उद्यमियों की भागीदारी से जुड़े विषय रखे। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर उनकी बात सुनी और उठाए गए मुद्दों पर सरकार की ओर से संज्ञान लेने का भरोसा दिया।

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यूपी अनलिमिटेड पोटेंशियल का प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी अनलिमिटेड पोटेंशियल का प्रदेश था, लेकिन बीच में बीमारू मानसिकता वाली सरकारों ने इसे बीमारू बना दिया था। जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन पर मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। आज कालीन उद्योग को तकनीक, डिजाइन और बाजार के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा मिली है।

भदोही का कालीन दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है सीएम ने कहा कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से 6,100 करोड़ रूपये का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी 60 फीसदी प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 10000 करोड़ रूपये है।

इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि जनपद में निर्मित 90 फीसदी कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी मिला है। कारपेट और टेक्सटाइल क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी स्थापित है।

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बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। वहां कार्गो सुविधा से भदोही के कालीन दुनिया के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। साथ ही वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे और वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कार्गो सुविधा उपलब्ध है।

उद्यमियों के साथ संवाद में कालीन निर्माता पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन में भारत नंबर वन है। कालीन तैयार होने में अधिक समय लगता है, इसलिए इसे मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से थोड़ा अलग रखते हुए उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने इसे अच्छा सुझाव बताते हुए कहा कि उन बुनकरों का अभिनंदन है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की धरोहर को जीवित रखा है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस सुझाव पर सरकार जरूर संज्ञान लेगी।

कालीन निर्यातक आदर्श पूर्णिमा ने कहा कि पहले इंडिया कारपेट एक्सपो दिल्ली में लगता था। तब यह कल्पना भी नहीं की गई थी कि इसका आयोजन भदोही में होगा। कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और वर्कर्स हैं, लेकिन कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) का मौजूदा ढांचा महिलाओं को अपने साथ नहीं जोड़ पाया है। महिलाओं के लिए ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे उनकी भागीदारी बढ़े और मनोबल मजबूत हो। इस पर मुख्यमंत्री ने सीईपीसी से महिला उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके लिए स्थान आरक्षित करने को कहा।

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