इलाहाबाद हाई कोर्ट (Image- Social Media)
Allahabad HIgh Court News:? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे परेशान करने वाला और गंभीर मुद्दा बताया है। कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा अपनी जन्मतिथि में 11 वर्षों की हेरफेर करने के मामले में जालसाजी और धोखाधड़ी पर नाराजगी जाहिर करते हुए, प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को उस व्यक्ति और संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने प्रयागराज के शिवशंकर पाल की याचिका पर दिया। याचिका में पाल ने पासपोर्ट अथॉरिटी से अपनी जन्मतिथि को 1994 से बदलकर 2005 करने की मांग की थी। जब कोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच की, तो पाया कि पाल ने हाईस्कूल की परीक्षा 2011 में पास की थी, जबकि उसने 2005 में जन्म लेने का दावा किया था। ऐसे में कोर्ट ने सवाल उठाया कि 6 साल की उम्र में यह परीक्षा कैसे दी जा सकती है।
इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए आरोपी ग्राम पंचायत और याचिकाकर्ता के खिलाफ बीएनएस के प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। यह जन्म प्रमाण पत्र 4 नवंबर 2025 को जारी किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 11 जुलाई 2005 बताई गई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के हाईस्कूल प्रमाणपत्र में उसकी जन्मतिथि 11 जुलाई 1994 थी, जो कि माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा 2011 में जारी किया गया था। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अपने पासपोर्ट आवेदन में आधार कार्ड में भी अपनी जन्मतिथि 1994 ही दर्ज करवाई थी। हालांकि, रिट याचिका में संलग्न आधार कार्ड की कॉपी में जन्मतिथि 11 जुलाई 2005 दिखी, जो बाद में सुधार की गई थी।
कोर्ट ने प्रयागराज की ग्राम पंचायत द्वारा नवंबर 2025 में जारी जन्म प्रमाणपत्र पर गहरी नाराजगी जताई, जिसमें जन्मतिथि को 2005 दर्शाया गया। कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता की बात मानी जाती है और जन्मतिथि को 2005 में सुधार दिया जाता है, तो यह दिखाएगा कि उसने 6 साल की उम्र में हाईस्कूल की परीक्षा दी थी, जो कि असंभव है।
इसलिए कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया कि वह इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करें। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर एफआईआर नहीं दर्ज की जाती, तो प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों में पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी भुगतान में संभावित घोटालों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने खासतौर से उन मामलों की जांच पर जोर दिया, जहां पेंशनर की मृत्यु के बाद भी उनके नाम पर फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट के जरिए पेंशन निकाली जा रही है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने चित्रकूट की 84 वर्षीय महिला जगुआ उर्फ जोगवा को अंतरिम जमानत देते हुए दिया। महिला पर आरोप है कि उसने पेंशन एरियर के नाम पर चित्रकूट ट्रेजरी से करीब 2.86 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से अपने खाते में ट्रांसफर कराए और बाद में रकम निकाल ली। यह राशि 7 फरवरी 2024 से 30 मई 2025 के बीच उसके खाते में जमा हुई थी।