बच्चों को दो-दो रोटी, दूध में पानी! हसनपुर स्कूल के प्रधानाध्यापक पर लगे गंभीर आरोप, बीईओ ने थमाया नोटिस

Mid Day Meal Scam: हापुड़ के धौलाना स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय हसनपुर के इंचार्ज प्रधानाध्यापक पर मिड-डे मील में अनियमितता, जातीय भेदभाव और छात्रा के घायल होने के बाद लापरवाही के आरोप लगे हैं।
Hapur School Row Principal Faces Serious Allegations Over Mid Day Meal and Student Safety
मिड-डे मील घोटाला(सोर्स- सांकेतिक फोटो)
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Hapur School Mid Day Meal Scam: उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ जहां बेसिक शिक्षा को सुधारने और 'निपुण भारत' के तहत स्कूलों को हाईटेक बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ जिम्मेदार शिक्षक ही इन योजनाओं को पलीता लगाने में जुटे हैं। जनपद हापुड़ के धौलाना विकास खंड से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय हसनपुर के इंचार्ज प्रधानाध्यापक तसनीम अली खान के खिलाफ मिड-डे मील में भारी घोटाला करने, बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने, साथी शिक्षकों से जातीय भेदभाव करने और जर्जर भवन की वजह से घायल हुई छात्रा को लावारिस छोड़ने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए धौलाना के खंड शिक्षा अधिकारी ने आरोपी इंचार्ज प्रधानाध्यापक को सख्त 'कारण बताओ नोटिस' स्पष्टीकर जारी कर दिया है।

सामाजिक संगठन 'शोषित क्रांति दल' ने किया भंडाफोड़

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ मेरठ स्थित सामाजिक संगठन 'शोषित क्रांति दल' ने किया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने 9 सितंबर को मेरठ मंडल के आयुक्त को एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजा था। इस शिकायती पत्र की प्रतियां जिलाधिकारी हापुड़, मुख्य विकास अधिकारी हापुड़ और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हापुड़ को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई थीं। शिकायत में इंचार्ज प्रधानाध्यापक तसनीम अली खान की तानाशाही और भ्रष्टाचार के एक-एक काले कारनामे का बिंदु वार कच्चा चिट्ठा खोला गया है।

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खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए नोटिस में शोषित क्रांति दल की शिकायत के आधार पर पांच बेहद गंभीर और हैरान करने वाले बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

मिड-डे मील में भारी घोटाला और बच्चों की सेहत से खिलवाड़

सरकार बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए स्कूल में पौष्टिक भोजन देती है, लेकिन शिकायत के अनुसार विद्यालय में प्रतिदिन मिलने वाले एमडीएम की मात्रा और गुणवत्ता में भारी कटौती की जा रही है। हद तो तब हो गई जब दूध में अत्यधिक पानी मिलाने और मिलावटी खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने की बात सामने आई। बच्चों के शारीरिक विकास को नजरअंदाज करते हुए उन्हें निर्धारित खुराक के स्थान पर पेट भरने के लिए केवल दो-दो रोटी ही दी जा रही है।

शौचालय न होने से दीवार पर पेशाब करने को मजबूर नौनिहाल

स्वच्छ भारत अभियान के दावों की हसनपुर के इस स्कूल में धज्जियां उड़ रही हैं। शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि विद्यालय परिसर में छात्रों के लिए शौचालय की कोई समुचित व्यवस्था ही नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि मासूम बच्चे स्कूल की दीवार पर पेशाब करने के लिए विवश हैं और शौच के लिए उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर अपने-अपने घर भागना पड़ता है।

कुर्सी बचाने का खेल जानबूझकर रोका जा रहा बच्चों का प्रवेश

सबसे चौंकाने वाला आरोप विद्यालय के प्रशासन और इंचार्ज की कुर्सी के मोह से जुड़ा है। आरोप है कि तसनीम अली खां जानबूझकर बच्चों के एडमिशन में छोटी-छोटी कमियां निकालकर उन्हें प्रवेश देने से रोकते हैं। अभिभावक हसनुद्दीन निवासी हसनपुर ने इसकी बाकायदा 4 अगस्त को बीएसए हापुड़ से शिकायत भी की थी।

शोषित क्रांति दल का दावा है कि बच्चों का प्रवेश इसलिए रोका जाता है ताकि स्कूल में छात्र संख्या कम रहे और किसी स्थायी प्रधानाध्यापक का पद सृजित/नियुक्त न हो सके। ऐसा करके तसनीम अली खां इंचार्ज की अपनी कुर्सी बचाए रखना चाहते हैं।

शिक्षा के मंदिर में जातीय भेदभाव और साथी शिक्षक का उत्पीड़न

स्कूल वह जगह है जहां समानता का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन आरोप है कि तसनीम अली खां अपने ही विद्यालय के सहायक अध्यापक गजेंद्र के साथ जातीय आधार पर भेदभाव करते हैं और उन्हें प्रताड़ित करते हैं। पीड़ित शिक्षक गजेंद्र ने 23 जुलाई को इसकी लिखित शिकायत बीएसए और बीईओ धौलाना से की थी, लेकिन तब से लेकर अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

मासूम बच्ची सोफिया की जान से खिलवाड़ और क्रूरता

शिकायती पत्र में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का भी जिक्र है। 25 अगस्त को स्कूल के जर्जर भवन की छत का प्लास्टर अचानक भरभरा कर गिर गया, जिसकी चपेट में आकर कक्षा-8 की छात्रा सोफिया के सिर में गंभीर चोटें आईं। एक जिम्मेदार शिक्षक का फर्ज था कि वह बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाता, लेकिन आरोप है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक इलाज कराने के बजाय लहूलुहान बच्ची को उसके घर छोड़ आए। इसके अलावा, जर्जर भवन की स्थिति को उच्चाधिकारियों से छिपाकर रखा गया, जिससे रोजाना मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ रही थी।

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खंड शिक्षा अधिकारी का सख्त अल्टीमेटम: 3 दिन में दें जवाब

इन सभी गंभीर शिकायतों पर लंबे समय तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया। शोषित क्रांति दल द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लगातार पोस्ट करने और उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने के बाद आखिरकार विभाग को हरकत में आना पड़ा।

धौलाना के खंड शिक्षा अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तसनीम अली खां को कड़े शब्दों में निर्देशित किया है कि, आदेश प्राप्ति के 03 (तीन) दिवस के भीतर अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपना बिन्दुवार लिखित स्पष्टीकरण एवं साक्ष्य प्रस्तुत करें। ​नोटिस में साफ कहा गया है कि यह कृत्य 'उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली' तथा बेसिक शिक्षा विभाग के सेवा नियमों का घोर उल्लंघन है।

जवाब न देने पर होगी सीधी विभागीय कार्रवाई

​खंड शिक्षा अधिकारी ने नोटिस के अंत में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा (3 दिन) के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि इंचार्ज प्रधानाध्यापक को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। तदुपरांत उनके विरुद्ध 'उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली' के अंतर्गत तत्काल कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं तसनीम अली खां की होगी।

यह घटना उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा प्रणाली में जड़ जमाए बैठे भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का एक जीता-जागता उदाहरण है। शोषित क्रांति दल ने मांग की है कि ऐसे दागी और लापरवाह प्रभारी प्रधानाध्यापक को तत्काल उनके पद से हटाकर निष्पक्ष विभागीय जांच की जाए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा विभाग 3 दिन का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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