Ganga Expressway: यूपी को मिली एक और सौगात, दिल्ली से पटना की दूरी भी होगी कम? जानें क्या है नया रूट
Ganga Expressway Update: गंगा एक्सप्रेसवे मौजूदा समय में प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है। इसकी लं. करीब 594 किमी है। यह एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जोकि पश्चिमी यूपी के मेरठ से प्रयागराज जाता है।
- Written By: अमन मौर्या
गंगा एक्सप्रेसवे (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Delhi To Patna Via Ganga Expressway: कल यानी 29 अप्रैल का दिन उत्तर प्रदेश के लिए खास होने वाला है। उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन करेंगे। इसकी तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं। प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के मौके पर एक और चर्चा जोर पकड़ रही है। गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के पहले लोगों के बीच ऐसी बातें चलने लगी हैं कि क्या इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से दिल्ली से पटना के बीच की दूरी कम हो जाएगी? अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई में गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू हो जाने से पटना, दिल्ली के और नजदीक आ जाएगा? आइए समझते हैं पटना से दिल्ली का पूरा गणित।
12 जिलों को जोड़ेगा एक्सप्रेसवे
पहले समझते हैं गंगा एक्सप्रेसवे के बारे में। एक्सप्रेसवेज इंडिस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा उत्तर प्रदेश में विकसित किया गया गंगा एक्सप्रेसवे मौजूदा समय में प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है। इसकी लं. करीब 594 किमी है। यह एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जोकि पश्चिमी यूपी के मेरठ से शुरू होकर संगम नगरी प्रयागराज तक आता है। इस बीच यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जिलों को जोड़ता है। इसकी कनेक्टिविटी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से भी जुड़ता है। यानी दिल्ली- NCR से निकलते ही शहर के बिना किसी ट्रैफिक में फंसे आप सीधे हाईस्पीड कॉरिडोर के माध्यम से मेरठ होते हुए प्रयागराज पहुंच सकते हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे की खासियत
प्रदेश सरकार का यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपनी विशेषता से और खास बन जाता है। एक्सप्रेसवे को अधिकतम स्पीड 120 किमी प्रति घंटे के हिसाब से डिजाइन किया गया है। बीच-बीच में कुछ किलोमीटर पर इंटरचेंज भी बनाए गए हैं, जिससे कि लोग आसानी से चढ़-उतर सकें। इसमें हाईटेक टोल सिस्टम की व्यवस्था है, जिससे यात्रियों को बार-बार रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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सड़क सुरक्षा के लिए अलर्ट स्ट्रिप्स और लगातार निगरानी की व्यवस्था भी है, जिससे कि दुर्घटनाओं को कम किया जा सके। अब बात करें लागत की। इस मेगा प्रोजेक्ट को बनाने में करीब 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है। इसमें जमीन अधिग्रहण की लागत भी शामिल है।
पटना-दिल्ली का मौजूदा रूट
अभी लोग पटना से दिल्ली का सफर यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के माध्यम से करते हैं। लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से बलिया जिला और वहां से गाजीपुर-बलिया नेशनल हाईवे से गंगा से लगते बक्सर-भरौली पुल से बिहार में प्रवेश होता है। इसके बाद पटना-बक्सर-आरा नेशनल हाईवे राजधानी पटना तक पहुंचा जाता है। इस दौरान तकरीबन 1060 किमी. तक की यात्रा 15 घंटे (बिना रुके) में पूरी की जाती है।
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यात्रियों के लिए एक और विकल्प
गंगा एक्सप्रेसवे के बन जाने से पटना जाने वाले यात्रियों को पहले दिल्ली से मेरठ (बिलौजी) एंट्री प्वाइंट तक जाना होगा। यहां से गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज पहुंचेंगे। अब यहां से दो रास्ते हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और NH19। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाने के लिए आपको सुल्तानपुर तक जाना होगा। यह यूपी के आजमगढ़ और बिहार के बक्सर के आरा होते हुए पटना पहुंचाएगा। जबकि दूसरा रूट दिल्ली-कोलकाता हाईवे से आरा होते हुए पटना ले जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से दिल्ली से पटना जाने वाले यात्रियों के लिए एक और विकल्प हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते यात्रा करने पर करीब 1072 किमी. की दूरी तय करनी पड़ेगी। इसमें भी करीब 15 घंटे का समय लगेगा। कुल मिलाकर दोनों रास्तों से समय और दूरी लगभग समान है। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से यात्रियों के पास दो विकल्प हो जाएंगे। इससे यात्रियों को आसानी होगी।
