मायावती की 'माया' पर राहुल गांधी की नजर! 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी चाल, यूपी में मचा नया सियासी बवाल

Rahul Gandhi Event in Lucknow: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी के फाउंडर कांशीराम की जयंती से दो दिन पहले 13 मार्च को लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे।
rahul gandhi demands bharat ratna for kanshi ram congress eyes bsp vote bank
राहुल गांधी व मायावती (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

UP Politics: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी के फाउंडर कांशीराम की जयंती से दो दिन पहले 13 मार्च को लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। रायबरेली से कांग्रेस नेता के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में जाने-माने दलित नेताओं, सोशल एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवियों की एक मीटिंग को संबोधित करने की उम्मीद है।

यह कार्यक्रम कांशीराम को श्रद्धांजलि देने के लिए किया जा रहा है, जिन्हें उत्तर भारत में 'बहुजन पॉलिटिकल मूवमेंट' का एक मजबूत स्तंभ माना जाता है। पार्टी नेताओं ने कहा कि कई जाने-माने दलित विचारकों और कम्युनिटी लीडर्स को चर्चा में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया है। चर्चा का मुख्य टॉपिक सोशल जस्टिस और गवर्नेंस में रिप्रेजेंटेशन होगा।

लखनऊ में राहुल गांधी क्या करेंगे?

एक पार्टी नेता ने कहा कि इस इवेंट का मुख्य फोकस सामाजिक न्याय और पिछड़े समुदायों को मजबूत बनाने की लड़ाई में कांशीराम के योगदान पर होगा। उम्मीद है कि राहुल गांधी आज की पॉलिटिक्स में कांशीराम के विचारों की अहमियत को हाईलाइट करेंगे और दलितों और दूसरे पिछड़े ग्रुप्स से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस का कमिटमेंट दोहराएंगे।

उत्तर प्रदेश में कांशीराम अहम क्यों?

इस कार्यक्रम को कांग्रेस पार्टी की उत्तर प्रदेश में दलित नेताओं और बुद्धिजीवियों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश वह राज्य है जहां कांशीराम ने BSP को एक बड़ी पॉलिटिकल ताकत बनाया था।

1984 में की थी बसपा की स्थापना

कांशीराम ने 1984 में BSP की स्थापना की थी। उन्हें उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों में दलितों और दूसरे पिछड़े समुदायों को एकजुट करके एक मजबूत पॉलिटिकल वोट बैंक बनाने का क्रेडिट दिया जाता है। 15 मार्च को बहुजन समाज पार्टी विशेष तौर पर उनकी जयंती मनाती है।

बसपा के वोटबैंक में होगी सेंधमारी?

पिछले कुछ सालों में कमी आने के बावजूद भी अधिकतम 'बहुजन समुदाय' का वोट मायावती की पार्टी बसपा को मिलता रहा है। अब कांग्रेस कांशीराम जयंती से दो दिन पहले कार्यक्रम आयोजित कर उनके सम्मान के जरिए बसपा के बहुजन वोटबैंक में सेंधमारी करने की कोशिश कर रही है।

सपा पहले ही कर चुकी है ये ऐलान

इस साल समाजवादी पार्टी ने भी घोषणा की है कि वह इस मौके को बड़े पैमाने पर मनाएगी और इसे 'PDA डे' के तौर पर मनाएगी। यानी कहीं न कहीं सपा की कोशिश भी यह है कि बसपा के वोटबैंक को अपने पाले में खींचा जाए।

उत्तर प्रदेश में मचा सियासी बवाल

BSP प्रेसिडेंट मायावती ने इस कदम के लिए समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव की आलोचना की है। उन्होंने इसे "पूरी तरह से पॉलिटिकल ड्रामा" कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि SP के "चाल, चरित्र और चेहरे" ने ऐतिहासिक रूप से बहुजन समाज के नेताओं और महापुरुषों का अनादर दिखाया है।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव से पहले कांशीराम की जयंती पर सपा और कांग्रेस का ये कदम नया सियासी भूचाल लेकर आने वाला है। बसपा सुप्रीमो मायावती समाजवादी पार्टी को पहले ही निशाना बना चुकी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के इस कार्यक्रम पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com