राम भक्त रूठे! चढ़ावा चोरी के बाद अयोध्या में सन्नाटा, 80% तक कारोबार ठप; 51 हजार देने वाले चढ़ा रहे सिर्फ ₹51

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट का असर स्थानीय कारोबार पर पड़ा। होटल कारोबार 80% तक प्रभावित होने और बाजारों में मंदी की बात सामने आई है।
ayodhya ram mandir temple controversy impact on business
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद (AI Generated Image)
Published on
Updated on

Ram Mandir Donation Controversy Impact: अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरी अयोध्या नगरी में इन दिनों मायूसी छायी हुई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों के विवाद ने न केवल श्रद्धालुओं के भरोसे को ठेस पहुंचाई है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर अयोध्या की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। भक्तों की संख्या में आई कमी और श्रद्धालुओं के दान न देने के रुख के कारण आसपास के छोटे-बड़े कारोबार को बढ़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राम मंदिर परिसर के बाहर खड़े देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं की सोच में बदलाव साफ देखा जा रहा है।

मंदिर प्रबंधन से टूटा भरोसा

श्रद्धालुओं का कहना कि हमें भगवान राम पर अटूट आस्था है, लेकिन मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट पर अब भरोसा नहीं रहा। चढ़ावे का पैसा चुराया जा रहा है, इसलिए अब दानपेटी में पैसे डालने के बजाय हम किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई या जरूरतमंद की मदद करेंगे।

हरियाणा के हिसार से पहुंचे रामकृष्ण जैन ने बताया कि वह 2024 में 5,100 रुपये का दान देकर गए थे, लेकिन इस बार केवल 51 रुपये ही चढ़ा रहे हैं। सोशल मीडिया और समाचारों में चंदा चोरी की खबरें फैलने के बाद श्रद्धालु अब खासकर सोना, चांदी, गहने और बड़ी नकद राशि दान करने से पूरी तरह कतरा रहे हैं।

80% तक घटा कारोबार

इस प्रकरण में होटल और गेस्ट हाउस उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। श्रद्धालुओं की घटती संख्या की सबसे भारी मार अयोध्या के होटल, होम स्टे और गेस्ट हाउस संचालकों पर पड़ी है। मंदिर के पास 20 कमरों का गेस्ट हाउस चलाने वाले हरिओम वर्मा के अनुसार, पिछले एक महीने में उनका कारोबार 80 फीसदी तक ठप हो गया है।

कमोबेश यही स्थिति मध्यम और बजट श्रेणी के 2-स्टार और 3-स्टार होटलों की भी है। होटल मालिकों का कहना है कि मानसून के मौसम में भीड़ थोड़ी कम होती है, लेकिन पिछले साल की तुलना में इस बार दान विवाद के चलते बुकिंग्स में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है।

बाजारों में सन्नाटे जैसे हालात

राम मंदिर के ठीक बाहर स्थित हरिश्चंद्र मार्केट, रिकाबगंज और आसपास की गलियों के दुकानदार ग्राहकी न होने से बेहाल हैं। पूजा सामग्री, पीतल के बर्तन, तस्वीरें और कपड़े बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि पिछले एक महीने में उनका व्यापार 50 से 70 प्रतिशत तक गिर गया है।

पूजा सामग्री विक्रेता बलराम गुप्ता बताते है कि पहले सामान्य दिनों में भी 10,000 से 12,000 रुपये रोजाना की बिक्री हो जाती थी, अब 2,000 रुपये कमाना भी मुश्किल हो रहा है। जो पर्यटक आते भी हैं, वे खरीदारी करने या रास्ता पूछने के बजाय दान चोरी और इसमें शामिल आरोपियों के बारे में सवाल पूछते हैं।

SIT कर रही जांच, ट्रस्टियों के इस्तीफे

जून में चंदा एवं चढ़ावे की चोरी का मामला उजागर होने के बाद पुलिस अब तक ट्रस्ट के 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। विवाद बढ़ता देख श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com