आवारा कुत्तों और छुट्टा मवेशियों के आतंक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, योगी सरकार से 14 दिन में अल्टीमेटम की मांग
Stray Dogs Issue: UP में छुट्टा पशुओं और आवारा कुत्तों के आतंक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने योगी सरकार को 14 दिनों के भीतर ठोस 'एक्शन प्लान' पेश करने का अल्टीमेटम दिया है।
- Written By: अनन्या तिवारी
सांकेतिक फोटो (सोर्स-डिजाइन फोटो)
Allahabad High Court Order On Stray Dogs: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर छुट्टा पशुओं और रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब कानून के घेरे में आ गया है। आम नागरिकों की सुरक्षा और आए दिन होने वाले हादसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को एक बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर ठोस नतीजे दिखाने होंगे।
14 दिन के भीतर तैयार करें मास्टर प्लान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में आवारा कुत्तों और छुट्टा मवेशियों की समस्या को एक गंभीर मुद्दा माना है। जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस समस्या से निपटने के लिए अगले दो सप्ताह (14 दिन) के भीतर एक व्यापक और प्रभावी एक्शन प्लान पेश करे। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सरकार की योजना ऐसी होनी चाहिए जिससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का भी पूरी तरह पालन किया जा सके।
इन खास इलाकों की होगी पहचान
अदालत ने सरकार को केवल सामान्य निर्देश नहीं दिए, बल्कि काम करने का तरीका भी समझाया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में ‘संस्थागत क्षेत्रों’ की पहचान की जाए और जिला व स्थानीय निकायवार उनकी सूची तैयार की जाए। कोर्ट ने अनिवार्य रूप से इन जगहों को सूची में शामिल करने को कहा है
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- सरकारी और निजी शिक्षण संस्थान (स्कूल और कॉलेज)।
- अस्पताल और मेडिकल कॉलेज।
- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसर।
- भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थान और बाजार।
कोर्ट का मानना है कि किसी भी जगह को केवल उसके नाम से नहीं, बल्कि वहां आने-जाने वाले लोगों की संख्या और उसके महत्व के आधार पर ‘संस्थागत क्षेत्र’ घोषित किया जाना चाहिए।
सड़कों और पार्कों में सुरक्षा पर विशेष फोकस
छुट्टा पशुओं की समस्या केवल शहर की गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेशनल हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं का भी बड़ा कारण है। कोर्ट ने इस मामले में NHAI और यूपी सरकार से हाईवे पर घूमने वाले पशुओं के लिए भी कार्ययोजना मांगी है। इसमें पशुओं की पहचान, उन्हें सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने, उनके चारे और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, पार्कों और खेल के मैदानों में घूमने वाले कुत्तों के प्रबंधन पर भी विचार करने को कहा गया है।
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आम जनता की सुरक्षा सबसे ऊपर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला केवल नगर निकायों की साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन के अधिकार, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। छुट्टा मवेशियों के कारण आए दिन लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और कई बार जान तक गंवानी पड़ती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सरकार को अपनी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए एक ऐसी समन्वित रणनीति बनाने को कहा है जो इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल सके।
अब सबकी नजरें योगी सरकार पर टिकी हैं कि वह 14 दिनों के भीतर कोर्ट के सामने क्या ठोस रोडमैप पेश करती है।
