अलंकार अग्निहोत्री, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Alankar Agnihotri Controversy: उत्तर प्रदेश के बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री लगातार चर्चा में हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और UGC के नए नियम से जुड़े विवाद को लेकर उन्होंने अपना छोड़ने का ऐलान किया है। इस बीच उन्होंने फिर से एक बड़ा बयान देते हुए सरकार द्वारा ब्राह्मणों पर अत्याचार का आरोप लगाया है। अलंकार अग्निहोत्री ने सवाल किया है कि क्या आप ब्राह्मणों का नरसंहार करना चाहते हैं?
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने अपने बयान में कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार में पिछले कुछ समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। ब्राह्मणों को अलग कर उन पर अत्याचार किया जा रहा है।
अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगया है कि कहीं एक डिप्टी जेलर एक ब्राह्मण को पीट रहा है। एक अन्य थाने में एक विकलांग ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला जा रहा है। बीते दो हफ्तों की हालिया घटनाओं को देखें जिसमें माघ मेला भी शामिल है। मौनी अमावस्या के दिन, हमारे ज्योतिर मठ (ज्योतिषपीठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज स्नान करने गए थे। बुजुर्ग भिक्षुओं सहित उनके शिष्यों को पैरों, लातों और जूतों से पीटा गया।
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि जब प्रशासन इस तरह से पिटाई करेगा तो क्या आप बाहर दूसरे समुदाय के लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि जब प्रशासन इस तरह से पिटाई करेगा तो नरसंहार हो जाएगा? आप क्या चाहते हैं? क्या आप ब्राह्मणों का नरसंहार करना चाहते हैं?” उन्होंने आगे कहा कि मैंने कल ही अपना इस्तीफा जारी कर दिया है। कल जब सुनियोजित साजिश विफल हो गई। DM सर के ऑफिस में फोन पर किसी ने आपत्तिजनक वार्ता की वो मैंने सुन लिया था।
मैंने अपने वकील को बताया की मुझे बंधक बनाने की बात हो रही है आप प्रेस को बता दें। तब आनन-फानन में मुझे जाने दिया गया। मुझे अन्य आरोप में सस्पेंड करने की सुनियोजित साजिश थी। हालांकि, अधिकारियों ने बंधक बनाने की ऐसी किसी साजिश से इनकार किया है।
यह भी पढ़ें: शंकराचार्य और UGC पर इस्तीफा देने वाले PCS अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, जांच के दिए गए आदेश
अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियम पर कहा कि भारत सरकार के राजपत्र में विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को घोषित अपराधी माना गया है। इसका मतलब है कि आपका बेटा या बेटी वहां पढ़ रहे होंगे। कोई भी उनके साथ भेदभाव का आरोप लगाकर झूठी शिकायत दर्ज करा सकता है और समता समिति उनका शोषण करेगी। इस दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे ब्राह्मण समाज के सांसद और विधायक पूरी तरह से मूक दर्शक बने हुए हैं।