

Agra Train Theft Case: डॉक्टर बनने के लिए अभ्यर्थी दिन-रात मेहनत करते हैं। परिवार का सपना होता है कि बेटा नीट क्वालीफाई कर डॉक्टर बने और सम्मानजनक जिंदगी जिए। लेकिन आगरा में सामने आया एक मामला इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू दिखाता है। जीआरपी के मुताबिक, एक युवक ने नीट परीक्षा क्वालीफाई करने के बावजूद महंगे शौक और लग्जरी लाइफ स्टाइल की चाह में अपराध का रास्ता अपना लिया। कभी बड़ी कोठियों को निशाना बनाने वाला यह युवक बाद में चलती ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगा।
जीआरपी आगरा कैंट और आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने गिरोह के दो कथित सदस्यों पुनीत और आकाश पाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी पुनीत पीलीभीत का रहने वाला है, जबकि उसका साथी आकाश पाल लखनऊ से संबंधित है। पुनीत के खिलाफ पहले से 27 से अधिक मुकदमे दर्ज होने की बात पुलिस ने बताई है।
पुलिस के मुताबिक पुनीत का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। उसके पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं, भाई एयरफोर्स में हैं और बहन डॉक्टर है। इसके बावजूद पुनीत ने महंगे शौक पूरे करने के लिए अपराध का रास्ता पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार, वह लखनऊ में हुक्का पार्लर भी चलाता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद पार्लर बंद हो गया। इसके बाद वह चोरी की घटनाओं में शामिल होने लगा। खास बात यह रही कि चोरी के साथ-साथ उसने नीट की तैयारी जारी रखी और परीक्षा भी क्वालीफाई कर ली।
पुलिस पूछताछ में सामने आई कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू पुनीत की गर्लफ्रेंड से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, उसकी गर्लफ्रेंड को कैंसर होने के बाद उसके इलाज में पुनीत ने करीब 80 लाख रुपये से अधिक खर्च किए। इसके अलावा महंगे कपड़े, हजारों रुपये की शर्ट, करीब 80 हजार रुपये तक के जूते, क्लब में जाना और हाई-प्रोफाइल लाइफ स्टाइल उसके शौक में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि इन्हीं जरूरतों और शौक को पूरा करने के लिए चोरी का सिलसिला बढ़ता गया।
जीआरपी आगरा के क्षेत्राधिकार राजेश मिश्रा ने बताया कि गिरोह के सदस्य चलती ट्रेनों के फर्स्ट एसी, सेकंड एसी और थर्ड एसी कोच में यात्रियों को निशाना बनाते थे। खासकर महिलाओं के सामान पर नजर रखते थे। मौका मिलते ही पलक झपकते ही सामान लेकर फरार हो जाते थे। चोरी के बाद उनका तरीका भी बेहद शातिराना था।
पुलिस के मुताबिक, जिस इलाके या जिले में चोरी की वारदात को अंजाम देते थे, वहां दोबारा चोरी करने से बचते थे और दूसरे क्षेत्र की ओर निकल जाते थे। यही रणनीति उन्हें लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बचाती रही।
फरवरी-मार्च में आगरा में हुई चोरी की एक वारदात की शिकायत जीआरपी आगरा कैंट में दर्ज हुई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो ट्रेनों में सक्रिय इस गिरोह की कड़ियां सामने आने लगीं। जीआरपी आगरा कैंट और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने जांच और सुरागों के आधार पर पुनीत और आकाश पाल को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 25 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण और नकदी बरामद करने का दावा किया है। पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर उनके अंतरराज्यीय नेटवर्क, चोरी की अन्य वारदातों और बरामद सामान के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
एक तरफ नीट क्वालीफाई कर डॉक्टर बनने की दहलीज तक पहुंचा युवक था, तो दूसरी तरफ महंगे शौक और कथित तौर पर जरूरतों को पूरा करने के लिए अपराध की दुनिया में उतरता चला गया। आगरा में की गई चोरी इस गिरोह के लिए आखिरकार आखिरी साबित हुई और जीआरपी-आरपीएफ के शिकंजे में आने के बाद दोनों आरोपी अब सलाखों के पीछे हैं।