

Aligarh Savarna Mahapanchayat Protest: नई दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ सवर्ण आंदोलन अब अलग-अलग जिलों में भी दस्तक देता हुआ दिखाई दे रहा है। यूजीसी से जुड़े नियमों के विरोध और सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज के युवाओं में नाराजगी सामने आ रही है। आगरा मंडल में प्रदर्शन के बाद मंगलवार को अलीगढ़ में भी सवर्ण महापंचायत का आयोजन किया गया। जुपिटर लॉज में हुई महापंचायत में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और सरकार तथा प्रशासन की नीतियों को लेकर सवाल उठाए।
महापंचायत में अर्जुन उपाध्याय एडवोकेट, सचिन राघव, तन्नू जी महाराज समेत कई वक्ताओं ने सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में सवर्ण समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन सत्ता में आने के बाद इसी वर्ग की समस्याओं की अपेक्षित सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से सवर्ण समाज के युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
वक्ताओं ने यूजीसी से जुड़े नियमों को लेकर भी विरोध जताया। उनका कहना था कि इन व्यवस्थाओं से सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस मुद्दे का जल्द समाधान निकाला जाए और ऐसी व्यवस्था लागू न हो, जिससे सामान्य वर्ग के युवाओं के हित प्रभावित हों।
महापंचायत में एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कानूनों के दुरुपयोग की शिकायतों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी कानून का इस्तेमाल किसी निर्दोष व्यक्ति के उत्पीड़न के लिए नहीं होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि महापंचायत को लेकर प्रशासन की ओर से दबाव बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि वक्ताओं ने समर्थकों और युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने तथा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी से जुड़े विवादित नियमों और सवर्ण समाज की अन्य मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को समय रहते युवाओं की चिंताओं का समाधान करना चाहिए, अन्यथा आने वाले समय में आंदोलन का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
महापंचायत में मौजूद लोगों ने सरकार से सवर्ण समाज के छात्रों और युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों की समीक्षा करने तथा उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।