फर्टिलिटी का भविष्य फ्रीजर में; आगरा में विशेषज्ञों ने बताया एग, स्पर्म और एम्ब्रियो प्रिजर्वेशन का महत्व
Agra IVF conference: ACE कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने एग, स्पर्म और एम्ब्रियो प्रिजर्वेशन की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की। फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन को भविष्य की संतान योजना के लिए अहम विकल्प बताया गया।
- Reported By: प्रदीप कुमार रावत | Edited By: स्निग्धा श्रीवास्तव
ACE कॉन्फ्रेंस (सोर्स- फोटो नवभारत)
Agra Fertility Preservation: करियर, बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र और देर से परिवार शुरू करने की प्रवृत्ति के बीच फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तेजी से आधुनिक प्रजनन चिकित्सा का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। आगरा के मुगल शेरेटन में आयोजित ACE 2026 कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से जुटे विशेषज्ञों ने आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर मंथन करते हुए बताया कि एग, स्पर्म और एम्ब्रियो को संरक्षित करने की तकनीक आने वाले समय में उन दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है, जो किसी कारण से भविष्य में संतान की योजना बनाना चाहते हैं।
कॉन्फ्रेंस के वैज्ञानिक सत्रों में ब्लास्टोसिस्ट डेवलपमेंट, माइक्रोमैनिपुलेशन, अल्ट्रा-फास्ट विट्रिफिकेशन, स्पर्म चयन, बायोप्सी वैलिडेशन और एम्ब्रियो विजुअलाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के जरिए अत्याधुनिक IVF लैब तकनीकों की बारीकियां भी समझाईं।
फ्रीजिंग तकनीक में बढ़ी उम्मीद
कंसल्टिंग डायरेक्टर एम्ब्रियोलॉजी डॉ. राजीव शर्मा ने बताया कि आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के इस्तेमाल से एग, स्पर्म और एम्ब्रियो फ्रीजिंग के परिणामों में लगातार सुधार हुआ है। उनके अनुसार पहले जहां सफलता दर करीब 10 से 15 प्रतिशत तक बताई जाती थी, वहीं अब यह बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
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हालांकि उन्होंने साफ किया कि बेहतर परिणामों के लिए भारत में IVF लैब्स को तकनीकी रूप से और मजबूत करने की जरूरत है। खासतौर पर भारत के उच्च तापमान और अधिक आर्द्रता को IVF लैब्स के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि लैब के भीतर तापमान और नमी का बेहद सटीक नियंत्रण जरूरी है। पश्चिमी देशों की तुलना में भारत की जलवायु अलग होने के कारण यहां की लैब्स को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
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प्रदूषण और तनाव भी प्रजनन क्षमता के लिए चुनौती
कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली को भी फर्टिलिटी से जोड़ते हुए कहा कि तनाव, प्रदूषण, असंतुलित जीवनशैली और बढ़ती उम्र पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में समय रहते जांच, उचित परामर्श और जरूरत के अनुसार आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है।
आयोजन सचिव डॉ.केशव मल्होत्रा ने बताया कि ACE 2026 में देशभर से एक हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जापान, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस समेत विभिन्न देशों से आए करीब 14 फैकल्टी सदस्यों के साथ डॉक्टर, एम्ब्रियोलॉजिस्ट और मेडिकल छात्र भी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच सीधे संवाद ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा की नई तकनीकों और संभावनाओं को समझने का अवसर दिया।
ACE 2026 का संदेश साफ रहा- फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक और जीवनशैली की परिस्थितियों के बीच तेजी से उभरता चिकित्सा विकल्प बन रहा है।
