ताजनगरी में शुरू हुआ 23वां आर्कएशिया फोरम, 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों का जमावड़ा

ArchAsia Forum Agra: IIA के तत्वावधान में 23वें आर्कएशिया फोरम का आगाज हुआ। वास्तु विशेषज्ञ स्थानीय और पारंपरिक वास्तु ज्ञान को आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल वास्तुकला से जोड़ने पर मंथन कर रहे हैं।
23rd ArchAsia Forum Begins Agra with 600 Architecture Experts from 24 Asian Countries
23वें आर्कएशिया फोरम (सोर्स- नवभारत लाइव)
Published on
Updated on

ArchAsia Forum 2026 Agra: ताजमहल की नगरी एक बार फिर दुनिया के नक्शे पर वास्तुकला और विरासत के बड़े केंद्र के रूप में उभरी है। ताजनगरी में मंगलवार से दुनिया के अलग-अलग देशों के जाने-माने वास्तु विशेषज्ञों का महामंथन शुरू हुआ। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी पैलेस में द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA) के तत्वावधान में पांच दिवसीय 23वें आर्कएशिया फोरम का आगाज हुआ। आयोजन में एशिया के 24 देशों के 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, भारतीय वास्तुकार, शिक्षाविद, विद्यार्थी और वास्तुकला विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।

इस बार फोरम की थीम ‘ब्रिंगिंग बैक वर्नाकुलर विजडम’ यानी स्थानीय और पारंपरिक वास्तु ज्ञान को फिर से आधुनिक वास्तुकला के केंद्र में लाना है। आगरा, जयपुर और दिल्ली के स्वर्णिम त्रिकोण में आयोजित हो रहे इस आयोजन का उद्देश्य प्राचीन वास्तु परंपराओं और आधुनिक तकनीक के बीच ऐसा संवाद स्थापित करना है, जिससे भविष्य की इमारतें अधिक टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाई जा सकें।

‘भारत की वास्तु विरासत दुनिया के लिए सीख’

फोरम के कन्वीनर आर्किटेक्ट तुषार सोगानी (जयपुर) ने कहा कि भारत की पुरातात्विक बुद्धिमत्ता, ऐतिहासिक वास्तु विरासत और अनूठी स्थापत्य कला को आधुनिक डिजाइन और भवन निर्माण में शामिल करना आज पूरी दुनिया की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विदेशी वास्तु विशेषज्ञों के सामने भारतीय वास्तु विरासत को प्रस्तुत करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। भारत की वर्नाक्युलर विजडम दुनिया को यह समझाने में सक्षम है कि टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल वास्तुकला के क्षेत्र में भारत की अपनी मजबूत परंपरा रही है।

23rd ArchAsia Forum Begins Agra with 600 Architecture Experts from 24 Asian Countries
PNB नकली नोट कांड: 17.29 करोड़ मामले में NIA की जांच तेज, मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क खंगाल रही एजेंसी

उन्होंने बताया कि आगरा में शुरू हुई कमेटी और काउंसिल मीटिंग्स में 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। वहीं 11 और 12 सितंबर को जयपुर में होने वाले ओपन फोरम में देश-दुनिया के ढाई हजार से अधिक आर्किटेक्ट्स के शामिल होने की उम्मीद है।

विरासत से सीखकर भविष्य की इमारतें बनाने पर जोर

आर्कएशिया के प्रेसिडेंट बूजियांग (चीन) ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने भवन निर्माण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, लेकिन इसके बावजूद पारंपरिक ज्ञान और विरासत से सीखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुरानी वास्तुकला में मौजूद अनुभव आज की निर्माण संबंधी चुनौतियों का समाधान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने आर्कएशिया फोरम को एशियाई वास्तुविदों के लिए तकनीकी और वैचारिक साझेदारी के साथ-साथ भारतीय वास्तु विरासत को समझने और उससे सीखने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

ताजमहल देखकर विदेशी वास्तुकार हुए अभिभूत

आईआईए के नेशनल प्रेसिडेंट आर्किटेक्ट विलास वसंत अवचत (मुंबई) ने कहा कि फोरम के पहले दिन विभिन्न देशों से आए वास्तु विशेषज्ञों ने ताजमहल का भ्रमण किया। ताजमहल की स्थापत्य कला और उसकी डिजाइन ने विदेशी वास्तुकारों को खासा प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से दुनिया को भारतीय प्राचीन वास्तु विरासत को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नए ढांचे में शामिल करने की कला सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स से देशभर के करीब 35 हजार आर्किटेक्ट जुड़े हुए हैं और संस्था पेशेवर तथा शैक्षणिक साझेदारी का वैश्विक मंच बन चुकी है।

400-500 साल पुरानी इमारतें आज भी मजबूत

आईआईए आगरा सेंटर के प्रेसिडेंट आर्किटेक्ट समीर गुप्ता विभव ने कहा कि ‘ब्रिंगिंग बैक वर्नाकुलर विजडम’ जैसे विषय पर विचार-विमर्श के लिए आगरा से बेहतर स्थान मुश्किल है। ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे तीन विश्व धरोहर स्मारक यहां वास्तुकला की जीवंत पाठशाला हैं।

उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक इमारतों में स्थानीय जलवायु, हवा, तापमान, प्रकाश और प्राकृतिक संसाधनों का बेहद वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया गया है। इसके विपरीत आज कई आधुनिक इमारतें बनने के महज दो-तीन वर्ष बाद ही लीकेज और अन्य समस्याओं से जूझने लगती हैं, जबकि सैकड़ों वर्ष पुरानी धरोहरों में आज भी मजबूती और टिकाऊपन दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक वास्तुकला को इन विरासत इमारतों से सीखने की जरूरत है।

पांच सभागारों में दिनभर चला वास्तु मंथन

फोरम के पहले दिन होटल जेपी पैलेस के पांच अलग-अलग सभागारों में ऑनलाइन और ऑफलाइन बैठकों का सिलसिला सुबह से शाम तक जारी रहा। यंग आर्किटेक्ट्स, सस्टेनेबल आर्किटेक्चर, आर्किटेक्चर एजुकेशन, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रोफेशनल प्रैक्टिस जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। इस दौरान आईआईए यूपी चैप्टर के अध्यक्ष संदीप सारस्वत (लखनऊ) भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

23rd ArchAsia Forum Begins Agra with 600 Architecture Experts from 24 Asian Countries
UPESSC Assistant Professor Recruitment 2026: 1936 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन शुरू; जाने आयु सीमा और सैलरी

परंपरा और आधुनिकता के बीच बनेगा सेतु

आर्कएशिया फोरम में स्थानीय जलवायु के अनुरूप डिजाइन, प्राकृतिक निर्माण सामग्री, पारंपरिक शिल्प और निर्माण तकनीक, पुराने भवन रूपों की आधुनिक व्याख्या, वर्नाक्युलर वास्तुकला, संस्कृति एवं स्थान, शहरी पहचान और डिजाइन शिक्षा के पुनर्विचार जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

फोरम का व्यापक उद्देश्य टिकाऊ वास्तुकला को बढ़ावा देना, एशियाई वास्तुकारों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान, नई तकनीकों के अनुकूलन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा एशिया की विविध वास्तु परंपराओं के संरक्षण को आधुनिक संदर्भ से जोड़ना है।

जापान के प्रख्यात वास्तुकार रिकेन यामामोटो होंगे खास आकर्षण

फोरम के प्रमुख आकर्षणों में जापान के प्रसिद्ध वास्तुकार और 2024 Pritzker Architecture Prize Laureate Riken Yamamoto का कीनोट सेशन शामिल है। उनका सत्र ‘Vernacular as a System, Not a Style’ विषय पर केंद्रित होगा।

जयपुर में होने वाले ओपन फोरम में मिट्टी, पत्थर, बांस और चूने जैसी प्राकृतिक निर्माण सामग्री, पारंपरिक शिल्प, आंगन आधारित वास्तुकला, गर्मी-हवा-छाया के अनुरूप इमारतों का डिजाइन, डिजाइन शिक्षा और शहरी पहचान जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विमर्श करेंगे।

कुल मिलाकर ताजनगरी में शुरू हुआ यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन सिर्फ वास्तु विशेषज्ञों का सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी स्थापत्य बुद्धिमत्ता को आधुनिक दुनिया के सामने रखने और भविष्य की टिकाऊ वास्तुकला का नया रास्ता तलाशने का वैश्विक मंच बनकर सामने आया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com