

Agra Sweet Potato Research: आगरा अब सिर्फ ताजमहल और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि आलू और शकरकंद के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान का भी बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र सीसार्क (CSARC) की दूसरी समन्वय समिति की बैठक में इसे दक्षिण एशिया के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान-साझाकरण के प्रमुख मंच के रूप में विकसित करने की रणनीति पर मंथन हुआ।
बैठक में भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र और नेपाल, भूटान व बांग्लादेश सहित दक्षिण एशियाई देशों के कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हुए। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता CIP के महानिदेशक डॉ. सीमोन हेक और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतिश चंद्र ने की।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि सीसार्क का दायरा केवल आगरा या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। इसे ऐसा क्षेत्रीय केंद्र बनाने की योजना है, जहां दक्षिण एशिया के देश आलू और शकरकंद से जुड़ी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक साथ काम कर सकें।
नेपाल, भूटान और बांग्लादेश समेत अन्य देशों के संस्थानों के साथ संयुक्त अनुसंधान, वैज्ञानिक विशेषज्ञता, जर्मप्लाज्म, तकनीक और मानव संसाधन के आदान-प्रदान पर जोर दिया गया। भारत में विकसित तकनीकों को पड़ोसी देशों तक पहुंचाने और दूसरे देशों के स्थानीय नवाचारों से सीख लेकर उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
बैठक का सबसे अहम फोकस यह रहा कि अत्याधुनिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचे। वैज्ञानिक उपलब्धियां केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहें, बल्कि खेतों में उत्पादकता, आय और किसानों की आजीविका में सुधार का माध्यम बनें।
इसके लिए जलवायु-सहिष्णु और बेहतर किस्मों, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक उत्पादन तकनीक, रोग निदान, जैव-सुदृढ़ीकरण, डिजिटल कृषि, टिकाऊ खेती तथा बाजार और पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी तकनीकों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतिश चंद्र ने कहा कि सीसार्क भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, तकनीक आधारित, बाजारोन्मुख और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने पोषण से भरपूर और जलवायु अनुकूल आलू-शकरकंद की किस्मों के साथ आधुनिक बीज प्रणालियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई।
आगरा में सीसार्क की स्थापना को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए इसे क्षेत्रीय Centre of Excellence के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में है और आगरा स्वयं आलू उत्पादन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
बैठक में सुझाव दिया गया कि सीसार्क की गतिविधियों को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और ओडिशा से आगे बढ़ाकर गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और अन्य प्रमुख आलू-शकरकंद उत्पादक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। इससे देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और किसानों को एक साझा वैज्ञानिक नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा।
सीसार्क को अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पांच दशक से अधिक पुराने सहयोग को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण मंच माना गया।
उन्नत प्रजनन, जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, आधुनिक बीज प्रणाली, रोग निदान, जलवायु-स्मार्ट कृषि, जैव-सुदृढ़ीकरण और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा तय की गई।
बैठक में वर्ष 2025-26 के अनुसंधान, प्रसार एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ वर्ष 2026-31 की अनुसंधान एवं विकास योजना तथा वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। आधारभूत ढांचे, मानव संसाधन, बजट, साझेदारियों और अनुसंधान पोर्टफोलियो की भी समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय उद्यानिकी बोर्ड (NHB) और सीसार्क के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत सीसार्क फार्म के लिए 10 हेक्टेयर भूमि के उपयोग को औपचारिक रूप दिया गया।
MoU पर राष्ट्रीय उद्यानिकी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा और CIP के महानिदेशक डॉ. सीमोन हेक ने हस्ताक्षर किए। यह भूमि सीसार्क की अनुसंधान, प्रदर्शन और प्रशिक्षण गतिविधियों को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक के बाद समन्वय समिति के सदस्यों ने आगरा के सिंगना स्थित सीसार्क फार्म का भ्रमण किया। एनबीसीसी के कार्यकारी निदेशक प्रदीप शर्मा ने सदस्यों को परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और आधारभूत ढांचे की प्रगति की जानकारी दी।
वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने केंद्र में विकसित की जा रही सुविधाओं तथा भविष्य में प्रस्तावित अनुसंधान गतिविधियों की तैयारियों का जायजा लिया।
बैठक से यह संकेत साफ है कि आगरा में आकार ले रहा सीसार्क आने वाले समय में “अनुसंधान से खेत तक, खेत से बाजार तक और भारत से दक्षिण एशिया तक” तकनीक और ज्ञान की कड़ी बनने की दिशा में बढ़ रहा है। यदि यह विजन जमीन पर उतरता है तो आगरा आलू और शकरकंद अनुसंधान के क्षेत्र में न केवल राष्ट्रीय बल्कि दक्षिण एशियाई स्तर पर भी अपनी नई पहचान बना सकता है।