

Agra Bus Shortage On Raksha Bandhan: रक्षाबंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का वह पर्व, जिसका इंतजार बहनें पूरे साल करती हैं। इस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें दूर-दराज से अपने मायके और भाइयों के घर पहुंचती हैं। सरकार से लेकर प्रशासन और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम तक ने इस बार यात्रियों को बेहतर परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे। कहा गया था कि रक्षाबंधन पर बहनों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
लेकिन आगरा के बस अड्डों पर शुक्रवार को इन दावों की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। बसें कम और यात्रियों की भीड़ ज्यादा दिखाई दी। ईदगाह बस अड्डे पर फतेहपुर सीकरी, जयपुर, धौलपुर, मुरैना और ग्वालियर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हालात यह रहे कि कई यात्री तीन से चार घंटे तक बस का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें अपने गंतव्य तक जाने के लिए बस नहीं मिल सकी।
बस अड्डे पर माताएं, बहनें, बेटियां और छोटे-छोटे बच्चे हाथों में सामान तो कई बहनों के साथ मासूम बच्चों को लिए बस के इंतजार में खड़ी दिखाई दी । भीड़ बढ़ती गई और यात्रियों की परेशानी भी उसी अनुपात में बढ़ती चली गई।
रक्षाबंधन के इस दृश्य का एक दूसरा पहलू भी बेहद खास रहा। जिसे अक्सर हिंदू पर्व के रूप में देखा जाता है, उसी रक्षाबंधन पर मुस्लिम समाज की महिलाएं और बेटियां भी बड़ी संख्या में अपने भाइयों तक पहुंचने के लिए बस अड्डों पर खड़ी दिखाई दीं।
यह तस्वीर अपने आप में एक बड़ा संदेश देती नजर आई - रिश्तों का कोई धर्म नहीं होता। भाई, भाई होता है और बहन, बहन। राखी का धागा मजहब की सीमाओं से कहीं ऊपर है। यही वजह है कि मुस्लिम बहनें भी अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए घंटों बस का इंतजार करती रहीं।
बस अड्डे पर मौजूद भीड़ मानो यह संदेश दे रही थी कि त्योहार भले ही किसी धर्म से जुड़ा हो, लेकिन भाई-बहन का प्रेम किसी मजहब की सीमा में कैद नहीं हो सकता।
ईदगाह बस अड्डे पर अव्यवस्था का आलम यह था कि जैसे ही कोई बस आती, यात्रियों में उसमें सवार होने की होड़ मच जाती। कई बार यात्री बस के पीछे तक दौड़ते नजर आए। भीड़ के इस तरह बस की ओर भागने से किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता था।
हैरानी की बात यह रही कि यात्रियों को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिसकर्मी या रोडवेज कर्मचारी भी नजर नहीं आए।
व्यवस्थाओं को लेकर जब रोडवेज के डिपो इंचार्ज से बात की गई तो उनका कहना था कि अब तक 80 बसें भेजी जा चुकी हैं और बसों की संख्या में कोई कमी नहीं है।
हालांकि जब मौके की स्थिति और घंटों से बस का इंतजार कर रहे यात्रियों की भीड़ के बारे में उन्हें बताया गया तो इस अव्यवस्था को लेकर उनके पास स्पष्ट जवाब नहीं था।
बहरहाल, रक्षाबंधन पर आगरा के बस अड्डों की तस्वीर ने परिवहन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। सरकार और परिवहन निगम के दावों के बीच बहनें घंटों बस का इंतजार करती रहीं।
लेकिन इसी भीड़ में एक तस्वीर उम्मीद भी जगाती रही। अलग-अलग धर्मों की बहनें एक ही मंजिल की ओर बढ़ती दिखाई दीं - अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने की मंजिल।
रक्षाबंधन ने एक बार फिर बता दिया कि रिश्ते मजहब से नहीं, भावनाओं से बनते हैं। राखी का एक धागा उन दीवारों को भी तोड़ देता है, जिन्हें समाज और सियासत अक्सर खड़ा करने की कोशिश करते हैं।