

Agra Cooperative Housing Society Dispute: सुरक्षा ग्रामीण सहकारी आवास समिति लिमिटेड, नेनाना जाट, ब्लॉक बरौली अहीर से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब समिति के वास्तविक सदस्यों की सूची तैयार कर न्यायालय में शपथपत्र के माध्यम से पेश की जानी है। इसी सिलसिले में समिति सदस्य श्याम सिंह चाहर ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष पहुंचकर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए।
श्याम सिंह चाहर ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को समिति के वास्तविक सदस्यों की सही सूची तैयार करने और उसे एफिडेविट के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को कोर्ट नंबर-2 में प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इसके बाद समिति के चुनाव को लेकर भी न्यायालय की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद श्याम सिंह चाहर अधिकारियों के सामने पहुंचे। उन्होंने अपने पक्ष से संबंधित दस्तावेज, रिकॉर्ड और कैमरे पर हुई बातचीत समेत कई साक्ष्य अधिकारियों को सौंपे। इस दौरान अतिरिक्त संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता, आगरा मंडल, एडीसीओ एत्मादपुर, एडीसीओ सदर कमलेश कुमारी और समिति सचिव सुनील कुमार मौजूद बताए गए।
श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर कुछ सदस्यों को भ्रमित कर वापस भेजने और उनके दस्तावेज अथवा साक्ष्य स्वीकार नहीं करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि समिति से जुड़े पुराने विवाद और कथित अनियमितताओं के तथ्य सामने न आएं, इसलिए ऐसा किया जा सकता है।
श्याम सिंह चाहर के मुताबिक अधिकारियों ने उनके दस्तावेज और साक्ष्य ले तो लिए, लेकिन जमा किए गए कागजात की रिसीविंग तत्काल नहीं दी गई। उन्होंने रिसीविंग पर अधिकारियों के हस्ताक्षर और विभागीय मोहर लगाने की मांग की।
इस दौरान उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा। श्याम सिंह को शाम करीब चार बजे दस्तावेजों की रिसीविंग उपलब्ध कराई गई। चाहर का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले में दस्तावेजी रिकॉर्ड इसलिए सुरक्षित रखा है, ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर तथ्य बदलने या कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होने की स्थिति न बने।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद समिति के वास्तविक सदस्यों की सूची तैयार होना इस पूरे विवाद में अहम माना जा रहा है। विभाग की ओर से तैयार की जाने वाली सूची और न्यायालय में पेश होने वाले एफिडेविट के बाद समिति के चुनाव को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
फिलहाल समिति से जुड़े लोगों की नजर 9 सितंबर को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। इसी सुनवाई में आगे की कार्रवाई और समिति के चुनाव को लेकर न्यायालय का रुख सामने आ सकता है।