

Agra Cantt Railway Station Case: त्तर मध्य रेलवे का आगरा रेल मंडल देश के सबसे महत्वपूर्ण रेल मंडलों में गिना जाता है। इसी मंडल के अंतर्गत आगरा कैंट, आगरा फोर्ट और मथुरा जंक्शन जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशन आते हैं, जहां प्रतिदिन हजारों देशी-विदेशी पर्यटक और लाखों यात्री आवाजाही करते हैं। लेकिन 12 जुलाई को आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हुआ एक घटनाक्रम अब रेलवे के इतिहास के सबसे विवादित मामलों में शामिल हो चुका है।
हीराकुंड एक्सप्रेस के आगमन के दौरान डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर और आरपीएफ के चार जवानों के बीच हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। वायरल वीडियो में डिप्टी एसएस के साथ कथित मारपीट और उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट ले जाने के दृश्य सामने आए, जिसके बाद पूरे देश में रेलवे कर्मचारियों और यूनियनों में भारी आक्रोश फैल गया।
घटना के बाद डीआरएम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों आरपीएफ कर्मियों को निलंबित कर दिया। बाद में उन्हें आगरा मंडल से हटाकर झांसी और प्रयागराज मंडल से संबद्ध कर दिया गया। इसी बीच इस पूरे घटनाक्रम की आंच तत्कालीन वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त पी. राजमोहन तक भी पहुंची और उनका तबादला नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे कर दिया गया। उनकी जगह वाराणसी से आए एस. रामकृष्णन ने सोमवार को आगरा में वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त का कार्यभार संभाल लिया।
नए कमांडेंट के कार्यभार ग्रहण करने के बाद डीआरएम द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने मामले की जांच और तेज कर दी है। मंगलवार को जांच टीम ने दोनों पक्षों से विस्तृत जानकारी जुटाई और संबंधित बयानों को रिकॉर्ड में दर्ज किया। जांच समिति पूरे घटनाक्रम की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है।
हालांकि, रेलवे कर्मचारियों के बीच जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। कई कर्मचारियों ने ऑफ द रिकॉर्ड कहा कि जिस तरह वायरल वीडियो में पूरा घटनाक्रम स्पष्ट दिखाई दे रहा है, उसके बावजूद जांच में हो रही देरी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि वीडियो में मारपीट और घसीटने की घटना साफ दिखाई दे रही है तो फिर इतनी लंबी जांच प्रक्रिया की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। हालांकि किसी भी कर्मचारी ने आधिकारिक रूप से इस पर बयान देने से इनकार किया।
दूसरी ओर, जो यूनियनें पहले खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं, उनके कई पदाधिकारी भी अब सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बच रहे हैं। इससे रेलवे कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
इस पूरे मामले में जब नवभारत ने पीड़ित डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि "मामला जांच के अधीन है, इसलिए इस समय कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।"
फिलहाल पूरे प्रकरण पर रेल मंत्रालय की सीधी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर और भी बड़े प्रशासनिक एवं कानूनी फैसले सामने आ सकते हैं। इतना तय है कि आगरा कैंट का यह मामला केवल एक विभागीय विवाद नहीं रह गया, बल्कि इसने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली, अनुशासन और छवि—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।