

Agra Bapu Nagar Eviction Notice Case: आगरा के बापू नगर इलाके में सिंचाई विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिस के बाद 200 से ज्यादा परिवारों में बेचैनी बढ़ गई है। विभाग ने इन परिवारों को नहर की जमीन पर कब्जे का हवाला देते हुए नोटिस जारी किए हैं। नोटिस मिलने के बाद स्थानीय लोगों को अपने आशियाने उजड़ने और बेघर होने का डर सताने लगा है। रविवार को बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय लोग अपने घरों के बाहर एकत्र हुए और कार्रवाई का विरोध जताया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बापू नगर में उनके परिवार पिछले करीब 60 वर्षों से रह रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इसी इलाके में गुजारी है। उनके बच्चों का जन्म और पालन-पोषण भी यहीं हुआ है। ऐसे में अचानक जमीन पर कब्जे का हवाला देकर नोटिस मिलने से परिवारों के सामने भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
लोगों का दावा है कि उनके पास लंबे समय से मकानों से संबंधित हाउस टैक्स की रसीदें, बिजली के कनेक्शन और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उनके मकान अवैध कब्जे की जमीन पर हैं तो इतने वर्षों से यहां रह रहे परिवारों के दस्तावेज और सुविधाएं किस आधार पर चली आ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
नोटिस की जानकारी सामने आने के बाद रविवार को इलाके में बड़ी संख्या में महिलाएं घरों से बाहर निकल आईं। महिलाओं ने कहा कि उनके सिर से छत नहीं छीनी जानी चाहिए। उनका कहना था कि कार्रवाई से पहले प्रशासन और सिंचाई विभाग को प्रभावित परिवारों की बात सुननी चाहिए और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने कहा कि वे सरकारी जमीन पर कब्जा करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन यदि किसी परिवार के पास वर्षों पुराने दस्तावेज और कर भुगतान की रसीदें हैं तो उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। लोगों ने मांग की कि किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण या बेदखली की कार्रवाई से पहले प्रत्येक परिवार के दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए।
बापू नगर में सिंचाई विभाग के नोटिस के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभाग आगे क्या कार्रवाई करेगा। क्या नोटिस के बाद प्रभावित परिवारों को अपनी बात रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा या फिर बेदखली की कार्रवाई शुरू होगी। फिलहाल 200 से ज्यादा परिवारों की नजर प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाले, ताकि वर्षों से रह रहे परिवारों के सामने अचानक बेघर होने का संकट खड़ा न हो।