Income Tax Rule 2026: पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था, 1 अप्रैल से क्या होगा आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?
Tax Saving Tips: 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा। CA अमित कुमार के अनुसार, HRA और अन्य लाभों के कारण अब पुरानी टैक्स व्यवस्था अधिक फायदेमंद हो सकती है। सही चुनाव करें और बचत बढ़ाएं।
- Written By: प्रिया सिंह
इनकम टैक्स एक्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Best Income Tax Savings Plan: भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ लागू होने जा रहा है जिससे करदाताओं की जेब और उनके मासिक बजट पर सीधा असर पड़ने वाला है। इस बड़े बदलाव के बाद हर नौकरीपेशा कर्मचारी के मन में यही सवाल है कि उसे आने वाले समय के लिए पुरानी कर व्यवस्था चुननी चाहिए या फिर नई व्यवस्था अपनानी चाहिए। CA अमित कुमार ने स्पष्ट किया है कि निवेश करने वाले लोगों के लिए अब पुरानी व्यवस्था में टैक्स बचाने और अपनी संपत्ति बढ़ाने के कई नए और आकर्षक मौके उपलब्ध हैं। करदाताओं को अपनी सैलरी स्ट्रक्चर और खर्चों को ध्यान में रखते हुए बहुत ही समझदारी और विशेषज्ञ की सलाह के साथ सही टैक्स रिजीम का चुनाव करना चाहिए।
नई कर व्यवस्था की सरलता
नई कर व्यवस्था उन लोगों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है जो LIC या PPF जैसी लंबी निवेश प्रक्रियाओं और उनके कठिन दस्तावेजों के झंझट में बिल्कुल नहीं पड़ना चाहते हैं। इस व्यवस्था में सरकार ने टैक्स की दरें काफी कम रखी हैं और 12 लाख रुपये तक की शुद्ध आय वाले व्यक्तियों को धारा 87A के तहत पूरी छूट दी गई है। हालांकि इसमें HRA और 80C जैसी बड़ी कटौतियों का कोई फायदा नहीं मिलता है इसलिए यह केवल उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जो बिना किसी तनाव के सीधा टैक्स भरना चाहते हैं।
पुरानी व्यवस्था में बड़े बदलाव
इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने पुरानी कर व्यवस्था को उन लोगों के लिए फिर से आकर्षक बना दिया है जो बहुत ही विचारपूर्वक विभिन्न सरकारी और निजी योजनाओं में अपना पैसा निवेश करते हैं। अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे विकसित शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को भी दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर ही 50 प्रतिशत HRA की टैक्स छूट प्रदान की जाएगी। पहले इन विशिष्ट शहरों में यह सीमा केवल 40 प्रतिशत निर्धारित थी जिससे अब वहां रहने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों को अपने टैक्स में बहुत बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
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भत्तों और उपहारों पर अधिक छूट
ऑफिस की तरफ से मिलने वाले मील कूपन की दैनिक सीमा को 50 रुपये से बढ़ाकर अब सीधे 200 रुपये कर दिया गया है जिससे कर्मचारियों के मासिक खाने-पीने के खर्च में बड़ी बचत होगी। इसके साथ ही कंपनी से मिलने वाले वार्षिक उपहारों पर मिलने वाली टैक्स छूट की राशि को भी 5,000 रुपये से बढ़ाकर अब सीधे 15,000 रुपये तक कर दिया गया है। बच्चों की स्कूल पढ़ाई, हॉस्टल के खर्च और मोबाइल लीजिंग जैसे अन्य महत्वपूर्ण भत्तों पर भी अब करदाताओं को सरकार की तरफ से पहले के मुकाबले काफी ज्यादा छूट मिलेगी।
कहां होगी आपकी ज्यादा बचत
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार अगर आपकी कुल सालाना सैलरी 20 लाख रुपये है और आप इन सभी नए टैक्स लाभों और निवेशों का सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं तो आप काफी पैसा बचा सकते हैं। पुरानी व्यवस्था में बने रहकर आप नई रिजीम के मुकाबले लगभग 1.25 लाख रुपये तक की अतिरिक्त शुद्ध बचत कर सकते हैं जो एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बहुत बड़ा अंतर पैदा करती है। अगर आप होम लोन के हप्ते चुका रहे हैं या किसी बड़े शहर में ऊंचे किराए पर रहते हैं तो पुरानी व्यवस्था ही आपके बैंक बैलेंस के लिए सबसे अधिक फायदेमंद है।
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विशेषज्ञ की महत्वपूर्ण सलाह
CA अमित कुमार ने देश के सभी करदाताओं को यह विशेष सलाह दी है कि 1 अप्रैल से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से मिलकर अपनी पूरी वित्तीय योजना विस्तार से जरूर बना लेनी चाहिए। सरकारी टैक्स कैलकुलेटर का गहराई से उपयोग करके दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करना आपके लिए बहुत जरूरी है ताकि आप अपनी साल भर की मेहनत की गाढ़ी कमाई को भारी टैक्स से बचा सकें। सही समय पर लिया गया एक छोटा सा सही फैसला आपकी साल भर की कुल बचत को निर्धारित करेगा और आपको भविष्य के सभी अनावश्यक वित्तीय तनावों से पूरी तरह मुक्त रखेगा।
