बीमा कंपनियों के खिलाफ शिकायतों में बढोत्तरी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Insurance Grievance Statistics In India: भारत सरकार देश के अधिक से अधिक नागरिकों को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रयास कर रही है। भारत में बीमा शिकायतों के आंकड़े के अनुसार पॉलिसीधारक अपनी बीमा कंपनियों की सेवाओं से काफी परेशान नजर आ रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने हाल ही में संसद में बीमा क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दावों के निपटारे में देरी ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा कंपनियों के खिलाफ कुल 2,57,790 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है क्योंकि वित्त वर्ष 2023-24 में 2,15,569 और 2022-23 में 2,02,640 शिकायतें थीं।
ग्राहकों द्वारा की जाने वाली शिकायतों में सबसे प्रमुख वजह बीमा कंपनियों द्वारा उनके दावों का समय पर निपटारा न करना है। पॉलिसीधारकों ने यह भी बताया कि कंपनियां अक्सर बिना किसी ठोस कारण के उनके दावों को पूरी तरह से अस्वीकार कर देती हैं। इसके अलावा सर्वाइवल बेनिफिट और मैच्योरिटी बेनिफिट का समय पर भुगतान न करना भी विवाद का एक बहुत बड़ा कारण बना हुआ है।
बीमाकर्ता द्वारा तय की गई राशि और अनुमानित नुकसान के बीच का अंतर भी पॉलिसीधारकों के बीच भारी असंतोष पैदा कर रहा है। कई बार ग्राहक अपनी पॉलिसी की परिपक्वता के समय मिलने वाले लाभों को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराते हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बीमा उद्योग को अपनी सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार करने की तत्काल आवश्यकता है।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC के खिलाफ सबसे ज्यादा 74,104 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का नाम आता है जिसे 20,527 शिकायतें मिलीं। सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियां इस सूची में शामिल हैं जो ग्राहकों की गहरी नाराजगी को दर्शाती हैं।
नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ 12,859 शिकायतें मिली हैं और केयर हेल्थ इंश्योरेंस के खिलाफ 10,281 मामले दर्ज हुए हैं। इसके साथ ही यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को 10,126 और नीवा बुपा हेल्थ इंश्योरेंस को 7,970 शिकायतों का सामना करना पड़ा है। इन कंपनियों के ग्राहकों ने दावों और सेवाओं को लेकर IRDAI के पास अपनी चिंताएं दर्ज कराई हैं।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के पास 7,781 जबकि द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास 7,768 शिकायतें दर्ज हैं। एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस और द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी भी क्रमशः 7,326 और 6,854 शिकायतों के साथ इस सूची में शामिल हैं। यह विस्तृत सूची बताती है कि बड़ी बीमा कंपनियां भी शिकायत निवारण के मामले में संघर्ष कर रही हैं।
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सरकार और नियामक संस्थाएं इन शिकायतों को गंभीरता से ले रही हैं ताकि पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा की जा सके। बीमा कंपनियों को अपने क्लेम सेटलमेंट रेशियो और ग्राहक सहायता तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की सलाह दी जा रही है। ग्राहकों को भी सलाह दी जाती है कि वे बीमा खरीदते समय कंपनियों के पिछले रिकॉर्ड और शिकायतों को जरूर देखें।