

Crop Damage Compensation Scheme Rules: यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में भारी बारिश से फसलें बर्बाद हुई हैं। धान, तिल और मूंग जैसी प्रमुख फसलों को बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से भारी नुकसान पहुंचा है।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर से लेकर गोरखपुर तक तीन दिनों से लगातार बारिश जारी है। अगर आपकी फसल खराब हुई है तो सरकारी नियम अनुसार मुआवजे के लिए आवेदन में बिल्कुल देरी न करें।
फसल बीमा न होने पर भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सरकार किसानों को वित्तीय सहायता देती है। सही समय पर सूचना और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करके किसान आसानी से मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।
फसल खराब होने पर सबसे महत्वपूर्ण कदम समय पर प्रशासनिक सूचना प्रदान करना है। नियमों के अनुसार प्राकृतिक आपदा आने के 72 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य है। लेखपाल यज्ञ प्रकाश दीक्षित के अनुसार सबसे पहले तहसील को सूचित करें।
तहसील को सूचना मिलते ही लेखपाल मौके पर जाकर जल्द से जल्द जमीनी सर्वे शुरू करता है। किसान कृषि रक्षक पोर्टल के टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार के क्रॉप इंश्योरेंस ऐप का उपयोग कर ऑनलाइन रिपोर्ट दी जा सकती है। किसान अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी, लेखपाल, पटवारी या बीमा प्रतिनिधि से संपर्क करें। जिस बैंक शाखा में किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी खाता है, वहां भी सूचना दी जा सकती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ओलावृष्टि, बिजली गिरने व जलभराव पर क्लेम मिलता है। इन स्थानीय आपदाओं में यदि 25 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होता है तो किसान पात्र हैं। इसके अलावा SDRF व NDRF के तहत आपदा राहत निधि से सहायता दी जाती है।
राज्य सरकार से इनपुट सब्सिडी पाने के लिए कम से कम 33 प्रतिशत नुकसान होना जरूरी है।अगर ओलावृष्टि, बिजली गिरने या बेमौसम बारिश से एक ही खेत को नुकसान पहुंचा है।
तो उस स्थिति में केवल उसी विशेष खेत का सर्वे करके मुआवजा स्वीकृत किया जाता है। पूरे गांव या ब्लॉक में नुकसान होना ऐसी स्थिति में आवश्यक नहीं माना जाता है। सूखा या बाढ़ की स्थिति में पूरे अधिसूचित क्षेत्र का क्रॉप कटिंग से आकलन होता है।
फसल नुकसान का मुआवजा पाने के लिए किसानों को 5 बड़ी गलतियों से बचना चाहिए। आपदा के 72 घंटे के बाद दी गई सूचना मान्य नहीं होती और क्लेम खारिज हो जाता है। आधार कार्ड, बैंक पासबुक और खसरा-खतौनी में नाम तथा स्पेलिंग बिल्कुल एक समान होनी चाहिए।
अगर खेत में बोई गई फसल बदली है तो 7 दिनों के भीतर CSC पर संशोधन कराएं। नुकसान का प्रमाण अपलोड करते समय साधारण कैमरे के बजाय क्रॉप इंश्योरेंस ऐप का प्रयोग करें। यह ऐप फोटो खींचते समय खेत की सटीक लोकेशन और तारीख अपने आप दर्ज कर लेता है।
सरकार मुआवजे की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए भेजती है। इसलिए सुनिश्चित करें कि बैंक खाता आधार से लिंक हो और DBT सेवा एक्टिव रहे।