1 जनवरी को न्यू ईयर सेलिब्रेट नहीं करते ये देश, लिस्ट देख चकरा जाएगा सिर!
New Year Facts: दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां 1 जनवरी को नया साल नहीं मनाया जाता। अलग-अलग कैलेंडर, परंपराएं और सांस्कृतिक मान्यताएं इन देशों को खास बनाती हैं जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
- Written By: प्रीति शर्मा
नए साल पर जश्न की तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
New Year Celebration: हर साल 1 जनवरी को न्यू ईयर मनाना एक वैश्विक परंपरा बन चुकी है जो मुख्य रुप से ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। हालांकि दुनिया की विविधता इतनी ज्यादा है कि आज भी कई देश और संस्कृति अपने पारंपरिक या चंद्र कैलेंडर को प्राथमिकता देते हैं। इन देशों के लिए नया साल सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि फसल, मौसम और धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक है।
चीन
चीन में नए साल की शुरुआत जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में मनाया जाता है। इसे स्प्रिंग फेस्टिवल भी कहा जाता है। यह उत्सव 15 दिनों तक चलता है।
थाईलैंड
पानी से स्वागत थाईलैंड में 1 जनवरी को नया साल नहीं बल्कि 13 से 15 अप्रैल के बीच सोंगक्रान मनाया जाता है। यह थाई बौद्ध कैलेंडर का नया साल है जिसमें लोग एक दूसरे पर पानी डालकर पुराने साल की अशुद्धियों को धोते हैं और खुशियां मनाते हैं।
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भारत
भारत में आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी को नए साल का जश्न मनाया जाता है। लेकिन सांस्कृतिक रूप से देश के अलग-अलग हिस्सों में नए साल की शुरुआत अलग-अलग समय पर होती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार विक्रम संवत का नया साल चैत्र मास से शुरू होता है। पंजाब में बैसाखी, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत में उगादि के रूप में नए साल का स्वागत किया जाता है।
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इस्लामिक देश
सऊदी अरब और ईरान सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देशों में नया साल हिजरी कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम की पहली तारीख को मनाया जाता है। वहीं ईरान में नौरोज मनाया जाता है जो वसंत विषुव के दिन पड़ता है। यह परंपरा हजारों साल पुरानी है।
इथियोपिया और श्रीलंका
इथियोपिया का कैलेंडर दुनिया से 7 साल पीछे चलता है और यहाँ नया साल 11 या 12 सितंबर को मनाया जाता है। वहीं श्रीलंका में सिंहली और तमिल नया साल अप्रैल के मध्य में मनाया जाता है जो सूर्य के मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक है।
इन देशों की ये परंपराएं हमें याद दिलाती हैं कि समय को देखने का हर संस्कृति का अपना अनूठा नजरिया है। दुनिया भले ही डिजिटल हो रही है लेकिन ये देश आज भी अपनी जड़ों और प्राचीन कैलेंडरों से मजबूती से जुड़े हैं।
