तुलसी विवाह के दिन इस मंदिर के दर्शन करने से पूरी होती है हर मनोकामना, दर्शन करने का बनाएं प्लान
वाराणसी में मौजूद तुलसी मानस मंदिर की दीवारों पर रामचरितमानस के दोहे और चौपाइयां उकेरी गई हैं। इस मंदिर का निर्माण करीब 1964 में कलकत्ता के एक व्यापारी ने करवाया था। तुलसी विवाह के दिन इस मंदिर के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
- Written By: प्रीति शर्मा
तुलसी मानस मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
वाराणसी: उत्तर प्रदेश का सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर वाराणसी को पहले लोग बनारस के नाम से जानते थे। इसे धर्म की नगरी भी कहा जाता है। यहां पर एक से बढ़कर एक मंदिर बने हुए हैं। त्योहारों के मौके पर इस जगह पर्यटकों की भीड़ देखने को मिलती है। अक्सर लोग यहां पर भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं। हिंदू धर्म में दिवाली, छठ के अलावा भी अन्य कई तरह के पर्व मनाए जाते हैं। यह विशेष महत्व रखते हैं। इसी में से एक त्योहार है तुलसी विवाह। यह सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग मंदिर के दर्शन करते हैं और तुलसी माता की पूजा की जाती है।
वाराणसी में एक मंदिर ऐसा है जहां पर तुलसी विवाह के दिन खास भीड़ मिलती है। माना जाता है कि इस दिन मंदिर के दर्शन करना शुभ होता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 12 नवंबर 2024 को है और इसी दिन देवउठनी एकादशी भी है। हालांकि यह मंदिर तुलसी से जुड़ाव नहीं रखता है लेकिन इसके नाम में तुलसी है जिसकी वजह से लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं। अगर आप वाराणसी घूमने जा रहे हैं, तो इस मंदिर के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं।
तुलसी मानस मंदिर, वाराणसी
वाराणसी में मौजूद तुलसी मानस मंदिर की दीवारों पर रामचरितमानस के दोहे और चौपाइयां उकेरी गई हैं। इस मंदिर का निर्माण करीब 1964 में कलकत्ता के एक व्यापारी ने करवाया था। तब से लेकर आज तक इस मंदिर की खूबसूरती कम नहीं हुई है। इस खूबसूरत मंदिर में आपको भगवान राम, सीता माता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्तियां देखने को मिलेंगी।
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परिवार संग बनाएं घूमने का प्लान
परिवार के साथ घूमने के लिए यह मंदिर बहुत ही बेहतरीन जगह है। मान्यताओं के अनुसार इस जगह पर ही तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की थी। इस वजह से इस मंदिर का नाम तुलसी मानस रखा गया। यह वाराणसी के सुंदर मंदिर की सूची में शामिल है। अगर आप दूसरे शहर से यहां आना चाहते हैं, तो यहां पर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ेगा। यहां पर आकर आप दुर्गाकुंड जाएं। इस मंदिर के पट सुबह 5.30 बजे खुल जाते हैं और दोपहर 12 बजे तक खुले रहते हैं। इसके बाद दोपहर 3.30 बजे से रात को 9 बजे तक इस मंदिर में दर्शन किए जा सकते हैं।
