भारत के इस मंदिर में मोर पर विराजमान है बप्पा, गणेश उत्सव पर दिखती है अनोखी रौनक

Famous Ganpati Temple: महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यहां पर भगवान गणेश के एक ऐसा मंदिर स्थित है जहां भगवान की सवारी मूषक नहीं बल्कि मोर है।
भारत के इस मंदिर में मोर पर विराजमान है बप्पा, गणेश उत्सव पर दिखती है अनोखी रौनक
त्रिशुंड गणपति मंदिर, महाराष्ट्र (सौ. सोशल मीडिया)
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Trishund Ganpati Temple: गणेश चतुर्थी का त्योहार देश में बड़े ही धूमधाम से करीब 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान घर-घर मूर्तियां स्थापित की जाती हैं और मंडप सजाए जाते हैं। बप्पा के आगमन की खुशी में व्यंजन और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। गणेश चतुर्थी के इस खास अवसर पर हम आपको एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मान्यता सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।

क्या है मंदिर का नाम

दरअसल भारत में भगवान गणेश जी का ऐसा मंदिर मौजूद है यहां पर बप्पा मूषक पर नहीं बल्कि मोर पर विराजमान हैं। यह मंदिर महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रिशुंड गणपति मंदिर है। शहर की चहल-पहल के बीच यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर का इतिहास लगभग हजारों साल पुराना है। पहले यह एक शिव मंदिर हुआ करता था लेकिन बाद में इसे भगवान गणेश जी को समर्पित कर दिया गया।

कब हुआ मंदिर का निर्माण

त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति मंदिर का निर्माण 24 अगस्त 1754 को धामपुर के भिक्षु गिरी गोसावी ने शुरू किया था। इसका निर्माण कार्य 1770 में पूरा हुआ। त्रिशुंड विनायक मंदिर का अर्थ तीन सूंड है। यह भगवान गणेश की अनोखी मूर्ति की खासियत है। ये प्रतिमा तीन आंखों वाली और छह भुजाओं वाली है। इस मूर्ति की खासियत है कि यहां बप्पा मोर पर सवार हैं। इस मूर्ति को कीमती रत्नों से सजाया गया है। भक्तों का मानना है कि यहां पर भगवान गणेश की पूजा करने से किसी भी नए काम में सफलता मिलती है।

मंदिर की अनोखी वास्तुकला

भगवान गणेश की मूर्ति इस मंदिर में काले पत्थरों से बनी हुई है। भगवान की आंखों और सूंड पर की गई कारीगरी देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। मूर्ति की सूंड में लड्डू भी बनाया गया है। मंदिर का सामने वाला हिस्सा कमाल की नक्काशी से भरा है। माना जाता है कि इसमें कुछ तस्वीरें देवी देवताओं और पुरानी कहानियों के पात्रों को उकेरती है।

गणेश चतुर्थी पर त्रिशुंड मंदिर जगमगा उठता है। इस खास मौके पर यहां भजन, कीर्तन और ढोल तासे से पूरा वातावरण गूंज उठता है। यहां लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। माना जाता है कि भक्तों की मनोकामनाएं यहां आकर पूरी होती हैं।

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