ब्रह्मपुत्र नदी (सौ. सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: मंदिरों तक पहुंचने के लिए देश में कई तरह के परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर और हवाई मार्ग का इस्तेमाल होता है तो कहीं रोपवे या केबल कारों का उपयोग किया जाता है। उसी प्रकार अब असम में भी जल मार्ग के जरिए मंदिर को जोड़ने का काम किया जाएगा। बता दें कि असम सरकार को केंद्रीय पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय से 10 जलमार्ग परियोजनाओं को विकसित करने की मंजूरी मिल गई है। इसके तहत राज्य के सात प्रमुख मंदिरों को ब्रह्मपुत्र नदी के जल मार्ग से जोड़ा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य टूरिज्म को बढ़ावा देना है।
असम सरकार को इसके लिए हरी झंडी मिल चुकी है। पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार यह परियोजना सागरमाला योजना के तहत 645.56 करोड़ रुपये के निवेश से बनाई जाएगी। इसे वित्त मंत्रालय की ओर से भी मंजूरी मिल चुकी है। बता दें कि सागरमाला परियोजना का उपयोग समुद्री इलाकों में जल मार्ग आदि बनाने का काम किया जाता है। जानकारी के अनुसार इस परियोजना के तरह 12 तैरने वाले टर्मिनल बनाए जाएंगे। इसके अलावा पांड और जोगीघोपा में 2 मल्टी मॉडल टर्मिनल, बोगीबील और टुबरी में दो स्थायी टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा।
असम सरकार इस परियोजना के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के जल मार्ग से 7 मंदिर को जोड़ेगी उसमें शक्तिपीठ कामाख्या, पांडुनाथ मंदिर, अश्वक्लांत मंदिर, गोविंद मंदिर, चक्रेश्वर मंदिर और औनियाती सात्रा मंदिर शामिल हैं। इन सभी मंदिरों को ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग से एक सूत्र में जोड़ा जाएगा। असम के ये मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं बल्कि इनके आसपास का वातावरण भी बहुत ही सुंदर है। इस वजह से पर्यटक और तीर्थ यात्री इन मंदिरों के दर्शन करने के लिए हर साल यहां पर आते हैं।
कामाख्या मंदिर भारत के असम में स्थित प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह देवी कामाख्या को समर्पित सबसे प्राचीन शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर अपने अनूठे अनुष्ठानों और देवी के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का जश्न मनाने वाले अंबुबाची मेले के लिए दुनिया भर से भक्तों को आकर्षित करता है।
अश्वकलंता मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और अपने शांतिपूर्ण वातावरण के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि यहाँ कृष्ण की मूर्ति पौराणिक ऋषि नारद द्वारा स्थापित की गई थी। असम के तेजपुर में दौल गोविंदा मंदिर भी भगवान कृष्ण को समर्पित है। यह मंदिर होली के त्यौहार के दौरान अपने रंगीन उत्सवों के लिए जाना जाता है।
उमानंद मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी में मयूर द्वीप पर बना एक और प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहाँ नाव से पहुँचा जा सकता है। चक्रेश्वर मंदिर असम के हाजी गाँव में एक सुंदर मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है और यह स्थान अपने शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। 17वीं शताब्दी में स्थापित औनियाती सातरा, असम के सबसे खूबसूरत और अनोखे स्थानों में से एक माजुली में है। यह स्थान भगवान कृष्ण को समर्पित एक प्रमुख वैष्णव मठ है।
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