मध्य प्रदेश में स्थित है दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, जानिए क्यों अधूरा रह गया मंदिर का निर्माण
मध्यप्रदेश राज्य के भोजपुर शहर में में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग विराजमान हैं इसके बारे में तो हर कोई जानते हैं लेकिन क्या आपको पता हैं विराजित शिवलिंग के इस विश्व प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण अधूरा है।
- Written By: दीपिका पाल
सावन का महीना जहां पर शुरू हो गया है वही पर इस मौसम में शिवभक्तों के सबसे प्रिय व्रत सावन सोमवार व्रत भी शुरु होने वाले है इसे लेकर भक्तों की तैयारियां जोरो-शोरों पर हैं तो वहीं पर मंदिरों में भी भगवान के अभिषेक से जुड़ी तैयारियां की जा रही है। मध्यप्रदेश राज्य के भोजपुर शहर में में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग विराजमान हैं इसके बारे में तो हर कोई जानते हैं लेकिन क्या आपको पता हैं विराजित शिवलिंग के इस विश्व प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण अधूरा है। आखिर क्या हैं इसके पीछे की पौराणि कथा जानते हैं..
इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज ने 1010 ई. से 1055 ई. में करवाया था। यहां सावन के महीने में तो पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ लगती है लेकिन सामान्य दिनों में भी भक्त इसके दर्शन के लिए पहुंचते है जहां पर इसकी मान्यता काफी है।
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यह प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग के लिए जहां पर काफी जाना जाता है वहीं पर इसकी बनावट की बात की जाए तो, एक ही चट्टान से बने इस शिवलिंग की ऊंचाई 2.3 मीटर, परिधि 5.4 मीटर और मंच सहित कुल ऊंचाई 12 मीटर है।
पौराणिक कथा के अनुसार- जब द्वापर युग में पांडव अज्ञातवास काट रहे थे तब यहां वह कुछ समय के लिए रुके थें और माता कुंती की पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। कहा जाता है इस मंदिर का निर्माण एक ही दिन में यानी सूर्योदय होने तक पूरा करना था, लेकिन पांडव मंदिर का निर्माण पूरा नहीं कर पाएं जिसकी वजह से भोजेश्वर मंदिर अधूरा रह गया और आज भी पूरा नहीं हो पाया है।
इस मंदिर की खासियत की बात की जाए तो, इसकी वास्तुकला और संरचना आकर्षण का केंद्र है जो एक अद्वितीय दर्शाती है। इस मंदिर में पूरी तरह भरा हुआ नक्काशीदार गुम्बद, पत्थर की संरचनाएं, बेहतरीन नक्काशी खूबसूरत लगती है।
इस मंदिर के प्रवेश द्वार और उनके दोनों तरफ उत्कृष्टता से गढ़ी गई आकृतियों से नज़र आती हैं, गर्भगृह का विशाल द्वार दो तरफ से गंगा एवं यमुना की प्रतिमाओं से सुसज्जित है। चार स्तंभों में शिव-पार्वती, सीता-राम, लक्ष्मी-नारायण और ब्रह्मा-सावित्री की प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है।
